इस बारे में पूछे जाने पर जिले के प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) एमपी शर्मा ने 'पीटीआई' से कहा, 'हम कोविड-19 के हर संक्रमित मरीज की पहचान होते ही उसके संपर्क में आए लोगों को तुरंत पृथकवास में भेज रहे हैं। इससे हमें इस महामारी का संक्रमण रोकने में मदद मिली है।' शर्मा ने दावा किया कि आम लोगों में भी कोविड-19 को लेकर जागरूकता बढ़ी है जिससे इस महामारी के मरीजों की तादाद में कमी आई है।
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ अमूल्य निधि ने कहा, 'लॉकडाउन खुलने के बाद रेड जोन में शामिल देश के अन्य जिलों में कोविड-19 के मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इंदौर में नए संक्रमितों का दैनिक आंकड़ा घटकर छह पर पहुंच जाना निश्चित तौर पर आश्चर्य में डाल देता है। इस विरोधाभास की जांच की जानी चाहिए।' उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को संबंधित 1,058 नमूनों की दोबारा जांच करानी चाहिए ताकि इंदौर जिले में कोविड-19 की वास्तविक स्थिति पता चल सके।
मरीजों के हितों में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन स्वास्थ्य अधिकार मंच के समन्वयक चिन्मय मिश्र ने कहा, 'इंदौर में कोविड-19 के मरीजों के ताजा सरकारी आंकड़ों पर सहज विश्वास नहीं किया जा सकता। हमारी मांग है कि इस महामारी की जमीनी स्थिति जांचने के लिए जिले भर में विस्तृत सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) किया जाए और इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।'
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक जिले में अब तक कोविड-19 के कुल 4,069 मरीज मिले हैं। इनमें से 174 लोगों की मौत हो चुकी है। इलाज के बाद संक्रमणमुक्त होने पर 2,906 मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी दी जा चुकी है। जिले में कोविड-19 के प्रकोप की शुरूआत 24 मार्च से हुई, जब पहले चार मरीजों में इस महामारी की पुष्टि हुई थी।