मध्यप्रदेश प्रशासन लॉकडाउन के दौरान ज्यादा सख्ती बरत रहा है। दुकानदारों पर जुर्माने का आदेश जारी कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि यदि किसी दुकानदार ने नियमों का उल्लघंन किया, तो उस पर पांच हजार रुपये का जुर्मान लगेगा। इसके बाद भी नहीं माने, तो दूसरी और तीसरी बार में दोगुना यानी 10 हजार रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। अगर फिर भी दुकानदार नहीं माने, तो दुकानों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
बिना कारण बाहर निकले, तो सीधे जेल पहुंच जाएंगे
बता दें कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने अगले आदेश तक हर रविवार को भोपाल, इंदौर और जबलपुर में लॉकडाउन का आदेश दिया है। इसके साथ ही अब हर शनिवार को रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू भी लगा रहेगा। इसके अलावा इन तीनों शहरों के सभी स्कूल और कॉलेज 31 मार्च तक बंद रखे जाएंगे। प्रशासन ने तीनों शहरों में लॉकडाउन के दौरान धारा 188 लागू की है। इसके मुताबिक, अगर आप बिना कारण घर से निकले तो सीधे गिरफ्तार होंगे।
मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचलों में होली के मौके पर मनाया जाने वाला भगोरिया पर्व कोरोना के चलते बंदिशों के बीच मनाया जाएगा। इस मशहूर पर्व से जुड़े साप्ताहिक हाटों पर कई बंदिशें लगाई गई हैं।
22 से 28 मार्च तक मनेगा पर्व
फागुनी मस्ती में डूबे हजारों आदिवासियों की मौजूदगी वाले इन हाटों में भीड़ के बीच महामारी की रोकथाम करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। अधिकारियों ने बताया कि खरगोन, झाबुआ,आलीराजपुर, धार और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों के 100 से ज्यादा ग्रामीण स्थानों पर 22 से 28 मार्च के बीच अलग-अलग दिनों में भगोरिया हाट लगने वाले हैं। खरगोन जिले के करीब 10,000 आदिवासी रोजगार के लिए पड़ोसी महाराष्ट्र में रहते हैं और इनमें से कई लोग भगोरिया मनाने के लिए पहले ही अपने घर लौट चुके हैं। चूंकि महाराष्ट्र कोरोना वायरस संक्रमण से बुरी तरह जूझ रहा है। इसलिए हमने महाराष्ट्र से लौटे लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों के आस-पास ही भगोरिया त्योहार मनाएं और हाटों में शामिल न हों। अधिकारियों ने बताया कि झाबुआ, आलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों में भी भगोरिया हाटों के दौरान कोविड-19 से बचाव की हिदायतों के पालन की कोशिश की जाएगी।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए 19 मार्च को राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह भगोरिया हाटों में कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएं।
क्या होता है भगोरिया पर्व?
होली के त्योहार से ठीक पहले लगने वाले भगोरिया मेलों में स्थानीय आदिवासियों के साथ ही जनजातीय समुदाय के वे हजारों लोग भी उमड़ते हैं जो आजीविका के लिए महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान जैसे पड़ोसी सूबों व अन्य राज्यों में रहते हैं। इससे पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में उत्सव का माहौल बन जाता है। आदिवासी टोलियां ढोल और मांदल (पारंपरिक बाजा) की थाप तथा बांसुरी की स्वर लहरियों पर थिरकते हुए भगोरिया हाटों में पहुंचती हैं और होली के त्योहार की जरूरी खरीदारी करने के साथ फागुनी उल्लास में डूब जाती हैं।