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कर्नल सौफिया कुरैशी मामला: मंत्री विजय शाह पर एक्शन की मंजूरी नहीं, कांग्रेस ने राष्ट्रपति से क्या मांग कर दी?

Wed, 26 Aug 2026 05:38 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में भाजपा के मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलने पर कांग्रेस ने मध्यप्रदेश सरकार को घेरा है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति से मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत पूरी कैबिनेट को बर्खास्त करने की मांग कर डाली है।

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विजय शाह को लेकर फिर घिरी एमपी सरकार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस ने बुधवार को मांग की है कि कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं देने पर मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार को राष्ट्रपति बर्खास्त करें। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सरकार एक बड़बोले मंत्री को राजनीतिक संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल एक राजनीतिक व्यक्ति को जवाबदेही से बचाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में मध्यप्रदेश सरकार को विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी पर दो सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया था। हालांकि, मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में कोई प्रस्ताव चर्चा के लिए नहीं आया। इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होनी है।

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मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अभियोजन की मंजूरी से संबंधित कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया गया। मंत्री राकेश सिंह ने यह जानकारी दी। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने भी बाद में पीटीआई से इसकी पुष्टि की। पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अभियोजन की मंजूरी मांगी है। ऐसी स्थिति में सरकार का रुख देश के सामने एक गंभीर संवैधानिक सवाल खड़ा करता है कि क्या सत्ता में बैठे लोग कानून से ऊपर हैं।

पत्र में क्या लिखा गया?
पत्र में कहा गया कि यह मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास का ‘‘बेहद शर्मनाक अध्याय’’ है। मामला केवल आदिवासी कल्याण मंत्री विजय शाह के आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री और पूरी कैबिनेट की संवैधानिक और नैतिक जवाबदेही से जुड़ा है। पटवारी ने लिखा, ‘‘इसलिए मुख्यमंत्री सहित पूरी कैबिनेट को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति सेना और संविधान की सर्वोच्च संरक्षक हैं। देश की जनता उनसे संविधान की गरिमा, न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और भारतीय सेना के सम्मान की रक्षा के लिए अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद करती है। कांग्रेस नेता ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करेंगे और राजनीतिक प्रभाव को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा नहीं बनने देंगे। कर्नल सोफिया कुरैशी उन सैन्य अधिकारियों की टीम का हिस्सा थीं, जिन्होंने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बारे में मीडिया को जानकारी दी थी।

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क्या था मामला?
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कर्नल कुरैशी को लेकर शाह की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना हुई थी। उनकी टिप्पणियों को कर्नल कुरैशी के धर्म को पहलगाम हमले में शामिल आतंकवादियों के समुदाय से जोड़ने के तौर पर देखा गया था। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए भाजपा मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी टिप्पणियों की निंदा करते हुए एसआईटी का गठन किया। एसआईटी की रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश होने के बाद न्यायाधीशों ने मध्यप्रदेश सरकार को मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी पर दो सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा था कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत अपराध का संज्ञान लेना जरूरी है। यह धारा सांप्रदायिक वैमनस्य और नफरत को बढ़ावा देने से संबंधित है।

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