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राष्ट्रपति को जीतू पटवारी का पत्र: मंत्री विजय शाह की बर्खास्तगी की मांग, प्रधानमंत्री से भी मांगा जवाब

Wed, 26 Aug 2026 05:34 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

जीतू पटवारी ने विजय शाह को मंत्री पद से हटाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। उन्होंने अभियोजन की मंजूरी नहीं देने पर राज्य सरकार को घेरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में जवाब मांगा। कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़ा यह मामला 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए है।
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पीसीसी चीफ जीतू पटवारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह से जुड़ा कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद एक बार फिर गरमा गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विजय शाह को मंत्री पद से हटाने और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित पूरे मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सवाल किया है कि सेना के सम्मान से जुड़े इस मामले में अब तक उनकी चुप्पी क्यों है। पटवारी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल ने विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसे अनुमति नहीं दी। कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार के इस फैसले को राजनीतिक संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि इससे न्यायिक प्रक्रिया और सरकार की संवैधानिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
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सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विजय शाह की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि भारतीय सेना की गरिमा से जुड़ा विषय है। उनका आरोप है कि अभियोजन की मंजूरी रोककर सरकार ने मंत्री को राजनीतिक संरक्षण देने का काम किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल ने कानूनी कार्रवाई के लिए अभियोजन की अनुमति मांगी है, तो सरकार ने इसे अस्वीकार करने का फैसला किस आधार पर लिया।

प्रधानमंत्री से मांगा स्पष्ट जवाब
जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सार्वजनिक मंचों से सेना और सैनिकों के सम्मान को सर्वोच्च राष्ट्रीय गौरव बताते रहे हैं। ऐसे में उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे मध्यप्रदेश सरकार के इस फैसले से सहमत हैं या नहीं। पटवारी ने कहा कि सेना का सम्मान किसी राजनीतिक दल तक सीमित विषय नहीं, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा है।
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प्रदेश सरकार के पूरे मंत्रिमंडल पर किए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि मामला अब सिर्फ विजय शाह के बयान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, अभियोजन की मंजूरी से जुड़े सरकार के फैसले ने मुख्यमंत्री और पूरे मंत्रिमंडल की संवैधानिक और नैतिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से संविधान की मर्यादा, न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और सेना के सम्मान की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।

11 मई 2025 को दिया था विवादित बयान
विवाद की शुरुआत 11 मई 2025 को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान विजय शाह के बयान से हुई थी। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद इसे लेकर व्यापक राजनीतिक विवाद हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित विशेष जांच दल ने जांच की। इसके बाद मंत्री के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी गई।

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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लगाई थी फटकार
अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही मध्यप्रदेश सरकार को समय-सीमा में निर्णय लेने का निर्देश दे चुका है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से जांच दल की रिपोर्ट के बाद मामले में तेजी से फैसला लेने को कहा था। विजय शाह की ओर से अदालत में सार्वजनिक माफी का उल्लेख किए जाने पर भी कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि माफी काफी देर से मांगी गई और यह अदालत के संज्ञान लेने के बाद सामने आई।

31 अगस्त की सुनवाई पर नजर
अब इस मामले में 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। राज्य सरकार के अभियोजन की मंजूरी नहीं देने के फैसले के बाद आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत के सामने सरकार को अपने फैसले का आधार स्पष्ट करना पड़ सकता है। मामले से जुड़े जानकारों के अनुसार, यदि विजय शाह मंत्री पद पर नहीं रहते हैं तो अभियोजन की कार्रवाई को लेकर कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे में आने वाली सुनवाई में सरकार और अदालत का रुख इस पूरे विवाद की आगे की दिशा तय कर सकता है।
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उमंग सिंगार ने राज्यपाल को लिखा पत्र, अभियोजन स्वीकृति की मांग
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के मामले में राज्यपाल को पत्र लिखा है। उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करते हुए अभियोजन स्वीकृति को लेकर निर्णय लेने की मांग की है। सिंघार ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में देश का गौरव बढ़ाने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी के अपमान से जुड़े मामले में एसआईटी ने अभियोजन स्वीकृति मांगी है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार ने अपने मंत्री को बचाने के लिए अभियोजन स्वीकृति देने से इनकार कर दिया। नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जब जांच एजेंसी अभियोजन की अनुमति मांग रही है, तो सरकार और मंत्रिमंडल द्वारा अपने ही मंत्री के मामले में स्वीकृति से इनकार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं और यह सवाल भी उठता है कि मंत्री के लिए अलग कानून क्यों? सिंघार ने राज्यपाल से आग्रह किया कि मामले में निष्पक्ष हस्तक्षेप कर मंत्री विजय शाह के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को अभियोजन स्वीकृति देने के लिए मंत्रिमंडल को निर्देशित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी मंत्री को उसके पद के कारण विशेष संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
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