'चाचा विधायक हैं हमारे...' पुलिस की घेराबंदी में फंसे गांजा तस्करों में से एक आरोपी ने कथित तौर पर विधायक से रिश्तेदारी का हवाला देकर कार्रवाई प्रभावित करने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने दबाव में आए बिना सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के वाहनों की तलाशी में 320.8 किलो गांजा, एक पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस, आठ मोबाइल और 24 हजार 90 रुपये नकद बरामद हुए। जब्त गांजे की कीमत करीब 64 लाख रुपये बताई गई है।
मामला छिंदवाड़ा पुलिस द्वारा पकड़े गए अंतरराज्यीय गांजा तस्करी नेटवर्क का है। कुंडीपुरा थाना, अमरवाड़ा पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मंगलवार रात कार्रवाई की। तस्करों के पास से मिली टाटा सफारी के कांच पर उत्तर प्रदेश विधानसभा का पार्किंग पास ‘MLA 602’ और ‘अधिवक्ता उच्च न्यायालय’ लिखा स्टिकर लगा था।
40 किलोमीटर तक पुलिस से भागते रहे तस्कर
पुलिस अधीक्षक अजय पाण्डेय के मुताबिक पुलिस को तस्करों के छिंदवाड़ा की ओर से गुजरने की सूचना मिली थी। इसके बाद नरसिंहपुर-नागपुर हाईवे पर सिंगोड़ी के पास पेंच नदी क्षेत्र में घेराबंदी की गई। पुलिस को देखते ही आरोपियों ने वाहन तेज रफ्तार से दौड़ा दिए। पुलिस टीम ने करीब 40 किलोमीटर तक उनका पीछा किया। इस दौरान टाटा सफारी ने रास्ते में पुलिस द्वारा खड़े किए गए कंटेनर में टक्कर मार दी। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर सातों आरोपियों को पकड़ लिया।
‘MLA 602’ पास और विधायक का नाम लेकर रौब
तस्करों से जब्त टाटा सफारी ने पुलिस की जांच को और दिलचस्प बना दिया। गाड़ी पर यूपी विधानसभा का पार्किंग पास ‘MLA 602’ लगा था। इसके साथ ‘अधिवक्ता उच्च न्यायालय’ का स्टिकर भी चस्पा था। पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस को प्रभावित करने के लिए कहा कि चाचा विधायक हैं हमारे।” हालांकि जांच में सामने आया कि यह वाहन पहले किसी विधायक के यहां किराए पर लगा था। उसी दौरान लगाए गए स्टिकर और पार्किंग पास वाहन पर रह गए थे। इस तरह विधायक के नाम का हवाला देकर पुलिस पर रौब जमाने की कोशिश की गई, लेकिन जांच में उसकी पूरी कहानी अलग निकली।
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खाली कंटेनर में बना रखा था गुप्त कैबिन
पुलिस ने अशोक लीलैंड कंटेनर की तलाशी ली तो वह बाहर से सामान्य और खाली दिखाई दे रहा था। संदेह होने पर पुलिस ने कंटेनर की बारीकी से जांच की। इसमें स्टील की अतिरिक्त दीवार बनाकर उसके पीछे गुप्त कैबिन तैयार किया गया था। इस कैबिन का दरवाजा ड्राइवर की सीट के पीछे से खुलता था। इसी गुप्त जगह में गांजे से भरे बोरे छिपाकर रखे गए थे। पुलिस ने यहां से 320.8 किलो गांजा बरामद किया।
ओडिशा से यूपी तक बिछा था तस्करी का रूट
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गांजे की खेप ओडिशा के बलांगीर जिले से लाई गई थी। इसे रायपुर, नागपुर, मुलताई, छिंदवाड़ा और नरसिंहपुर होते हुए झांसी के रास्ते संतकबीर नगर पहुंचाया जाना था। पुलिस के अनुसार, गांजा संतकबीर नगर निवासी सदनलाल चौरसिया के कहने पर मंगाया गया था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि गिरोह पहले इंदौर रूट का इस्तेमाल करता था, लेकिन इस बार रास्ता बदलकर छिंदवाड़ा के रास्ते से खेप ले जाने की कोशिश की गई।
गांजे के साथ पिस्टल और कारतूस भी मिले
पुलिस ने गांजे के अलावा एक पिस्टल और पांच जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं। पूछताछ में आरोपी मोनिस ने बताया कि पिस्टल उसे कथित तौर पर सदनलाल चौरसिया ने उपलब्ध कराई थी। इसके चलते मामले में आर्म्स एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं। मामले में संतोष गिरी, मोनिस, अजय यादव, कृष्ण कुमार, आदर्श सिंह, ऋषभ सिंह और शुभम सिंह को गिरफ्तार किया गया है। संतोष को कंटेनर चालक और कृष्ण कुमार को टाटा सफारी चालक बताया गया है। वहीं कथित नेटवर्क संचालक सदनलाल चौरसिया निवासी संतकबीर नगर फरार है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ओडिशा से गांजे की खेप कौन उपलब्ध करा रहा था, यूपी में इसे कौन रिसीव करता था और इस नेटवर्क में छिंदवाड़ा समेत अन्य जिलों के कितने लोग जुड़े हैं।