इंद्रा कॉलोनी की पानी की टंकी के पास बुधवार सुबह मिले शुभम उर्फ बम्बईया वर्मा के शव के मामले में पुलिस ने उसके ही दोस्त सुमित वंशकार को आरोपी बनाया है। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार देर रात दोनों के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान सुमित ने शुभम पर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के चलते शुभम की मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी मौके से भाग गया। चौरई पुलिस ने जांच के बाद 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
शरीर पर चोट के निशान मिलने के बाद हत्या की आशंका
बुधवार सुबह इंद्रा कॉलोनी स्थित पानी की टंकी के पास एक युवक के अचेत पड़े होने की सूचना पुलिस को मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस को युवक के शरीर पर चोट के निशान मिले। परिस्थितियां संदिग्ध होने पर हत्या की आशंका जताई गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की और घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम को बुलाया। शव का पोस्टमार्टम कराया गया। जांच आगे बढ़ी तो मृतक की पहचान लोहारा निवासी शुभम उर्फ बम्बईया वर्मा के रूप में हुई।
कुछ सप्ताह पहले हुई थी दोनों की दोस्ती
पुलिस के अनुसार, शुभम और इंद्रा कॉलोनी निवासी 20 वर्षीय सुमित पिता भोजेलाल वंशकार की दोस्ती कुछ सप्ताह पहले हुई थी। दोनों साथ रहते थे और गांजे का सेवन भी करते थे। मंगलवार देर रात पानी की टंकी के पास दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद के दौरान सुमित ने शुभम पर चाकू से हमला कर दिया। चोटें गंभीर होने के कारण शुभम की जान चली गई।
हमले के बाद तेल, हल्दी और प्याज लगाने की चर्चा
इस हत्याकांड में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि चाकू से हमला करने के बाद आरोपी ने शुभम के शरीर पर तेल, हल्दी और प्याज लगाने का नाटक किया। हालांकि, इस घटनाक्रम की पुष्टि जांच के आधिकारिक तथ्यों से होना बाकी है। पुलिस की जांच में वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं का खुलासा हो सकता है।
48 घंटे में गिरफ्तारी, न्यायालय ने जेल भेजा
थाना प्रभारी मोहन सिंह मर्सकोले के नेतृत्व में पुलिस ने मामले की जांच करते हुए सुमित को गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत कार्रवाई की गई। उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
पुलिस टीम की इन सदस्यों ने निभाई भूमिका
एसडीओपी भारती जाट के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी मोहन सिंह मर्सकोले, सहायक उपनिरीक्षक संजय ठाकुर, पूनम सनोडिया, लता मेश्राम, प्रधान आरक्षक गोपाल साहू, सूर्योदय बघेल, राजू भारती, राजपाल बघेल, राजेश सनोडिया, संजय पटेल और पुलिस स्टाफ की भूमिका रही।