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MP Cough Syrup Scandal: बच्चों की मौत के मामले में अधूरी जांच के बीच 4500 पेज की चार्जशीट, कई अहम रिपोर्ट गायब

Sat, 03 Jan 2026 02:56 PM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा

सार

परासिया के जहरीले कफ सिरप कांड में एसआईटी ने न्यायालय में साढ़े चार हजार पृष्ठों की चार्जशीट दाखिल की है, लेकिन पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट न होने से जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े हो गए हैं। 22 बच्चों की मौत के बावजूद कई अहम कड़ियां अब भी अधूरी हैं।
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कफ सिरप - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप कांड में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने परासिया न्यायालय में करीब साढ़े चार हजार पृष्ठों की फाइनल चार्जशीट पेश कर दी। हालांकि, चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद जांच की कई अहम कड़ियां अब भी अधूरी हैं, जिससे पुलिस जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चार्जशीट में न तो विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट शामिल है, न ही बिसरा की रासायनिक जांच और चिकित्सा विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट, जो इस मामले में निर्णायक मानी जा रही हैं।

गौरतलब है कि इस कांड में अब तक किडनी फेल होने के कारण 22 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन जांच एजेंसियों के दायरे में अभी भी कई अन्य लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।

पीड़ित पक्ष असंतुष्ट, उठाए गंभीर सवाल

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चार्जशीट दाखिल होने के बाद पीड़ित परिजनों के वकील संजय पटोरिया ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामले में पुलिस की जांच बेहद धीमी रही है। चार्जशीट में ऐसे महत्वपूर्ण साक्ष्य शामिल नहीं किए गए हैं, जिनके आधार पर दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।

एसआईटी का दावा जांच अभी जारी
वहीं, एसआईटी अधिकारियों का कहना है कि कुछ अहम जांच रिपोर्ट अभी संबंधित एजेंसियों से प्राप्त नहीं हुई हैं। रिपोर्ट मिलते ही पूरक चार्जशीट पेश की जाएगी। फिलहाल प्रकरण की विवेचना जारी है।

नागपुर के डॉक्टर से 281 सेकंड की बातचीत

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जांच में सामने आया है कि अगस्त 2025 के अंतिम सप्ताह से परासिया क्षेत्र में बच्चों में गंभीर बीमारी के लक्षण दिखने लगे थे। आरोपी चिकित्सक डॉ. प्रवीण सोनी के पास इलाज के लिए पहुंचे कई बच्चों में किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं पाई गईं।

11 सितंबर 2025 को वेदांश पवार नामक बच्चा नागपुर के डॉ. प्रवीण खापेकर के पास गंभीर अवस्था में पहुंचा। परिजनों से चर्चा के बाद डॉ. खापेकर ने आरोपी चिकित्सक डॉ. प्रवीण सोनी से 281 सेकंड तक फोन पर बातचीत की थी। इसी के बाद कफ सिरप में गड़बड़ी की आशंका और गहराई।

संदेह के बावजूद जारी रही बिक्री
जांच में यह भी उजागर हुआ है कि कफ सिरप में गड़बड़ी की जानकारी सामने आने के बावजूद डॉ. प्रवीण सोनी की पत्नी के मेडिकल स्टोर से ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप की बिक्री जारी रही, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। इस प्रकरण में जिन मृत बच्चों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ, उनके बिसरा की रासायनिक जांच रिपोर्ट अब तक पुलिस को प्राप्त नहीं हुई है। वहीं, बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए गठित चिकित्सा विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट भी अभी लंबित है।

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सीपीपी की जगह दिया गया कोल्ड्रिफ सिरप
जांच के अनुसार, मयंक पिता नीलेश सूर्यवंशी को डॉक्टर ने सीपीपी सिरप लिखी थी, लेकिन रसेला मेडिकल स्टोर से सीपीपी की जगह कोल्ड्रिफ कफ सिरप दे दिया गया। डॉ. ठाकुर की प्रिस्क्रिप्शन पर्ची में भी दवा का नाम संशोधित नहीं किया गया। इसी सिरप के सेवन से मयंक की किडनी फेल हुई और उसकी मौत हो गई।

अब भी बने हुए हैं कई सवाल

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चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं
जांच पूरी हुए बिना फाइनल चार्जशीट क्यों पेश की गई?
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट कब तक सामने आएंगी?
क्या सभी जिम्मेदारों पर प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी?

फिलहाल पुलिस का कहना है कि शेष रिपोर्ट प्राप्त होते ही आगे की कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी।

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