जिले में यूरिया खाद की किल्लत को लेकर किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। बोवनी का समय होने के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल पा रहा, जिसके चलते वे सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। इसी बीच यह मुद्दा अब सियासी रंग भी लेने लगा है।
छिंदवाड़ा जिले में यूरिया खाद की किल्लत को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। बोवनी के समय खाद नहीं मिलने से किसान दिनभर सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। इस बीच मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र के किसान पिछले एक महीने से यूरिया के लिए भटक रहे हैं। आंदोलन, धरना और प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार ने उन्हें सिर्फ आश्वासन और पुलिस की लाठियां दी हैं।
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कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर छिंदवाड़ा और पांढुर्णा के किसानों के साथ भेदभाव कर रही है और यूरिया की सप्लाई रोकी जा रही है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया जिसमें किसान समितियों के बाहर लंबी कतार में खड़े नजर आ रहे हैं। कमलनाथ ने ऐलान किया कि अब इंतजार खत्म हो गया है। किसानों के अन्याय और उपेक्षा के खिलाफ कांग्रेस 20 अगस्त को छिंदवाड़ा में विशाल जनआंदोलन करेगी। इसके लिए कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं।
सोनू मांगे पर एफआईआर से बढ़ा विवाद
यूरिया संकट पर हुए प्रदर्शन में कांग्रेस नेता सोनू मांगे समेत कई नेताओं पर दर्ज एफआईआर से कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला। पार्टी का कहना है कि सरकार किसानों की आवाज दबाने और आंदोलनकारियों को डराने की कोशिश कर रही है।
इधर, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया। छिंदवाड़ा सांसद विवेक बंटी साहू ने कहा कि जिले में यूरिया का कोई संकट नहीं है। पिछले साल से अधिक खाद की आपूर्ति की गई है। उन्होंने कहा कि बारिश की वजह से सप्लाई में थोड़ी दिक्कत जरूर आई थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य है। विश्लेषकों का मानना है कि किसानों का असंतोष कांग्रेस को बड़ा मौका दे सकता है। यदि 20 अगस्त को बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतरते हैं, तो यह सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण संदेश होगा। दूसरी ओर भाजपा भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और किसानों से सीधा संवाद बढ़ाने की तैयारी कर रही है।