नींबू पानी बेचने वाले मनोज ने...
मनोज विश्वकर्मा, जो छोटा महादेव के पास नींबू पानी की दुकान चलाते हैं, उन्होंने पहल करते हुए पास के आदिवासी युवकों को अंगूठी खोजन के कार्य में लगाया। एक दर्जन से अधिक युवाओं ने दो दिन तक झरने के नीचे से रेत निकालकर छानी, पत्ते समेटे और अथक प्रयास के बाद अंततः अंगूठी खोज निकाली।
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आदिवासियों की मेहनत और ईमानदारी से अभिभूत हुईं राजकुमारी
राजकुमारी इटका क्लेट को जैसे ही उनकी रिंग वापस मिली, वे आदिवासियों की मेहनत और ईमानदारी से अभिभूत हो उठीं। उन्होंने खुशी में आदिवासी युवकों को पांच लाख रुपये इनाम देने का प्रस्ताव दिया, लेकिन युवकों ने विनम्रता से इसे ठुकरा दिया। उन्होंने कहा, आप हमारे मेहमान हैं, हम आपके संकट का लाभ नहीं उठाना चाहते। आदिवासियों ने केवल अपनी मेहनत की 41 हजार रुपये मजदूरी ली।
उपचार करवाने आई थीं राजकुमारी
राजकुमारी ने आदिवासियों के इस चरित्र की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत में अतिथि सत्कार की भावना आज भी जीवित है। बताया गया कि राजकुमारी इटका क्लेट अपने स्पाइन के आयुर्वेदिक उपचार के लिए डॉ. टाटा के पास छिंदवाड़ा आई थीं। उपचार के बाद पातालकोट-तामिया घूमने की उनकी इच्छा थी, जहां यह अद्भुत घटना घटी। डॉ. टाटा ने बताया कि राजकुमारी भारतीय संस्कृति और आदिवासी समुदाय की ईमानदारी से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने इस घटना को हमेशा अपने साथ संजोए रखने की बात कही।
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