पूर्व सीएम उमा भारती पर साल 1998 में लोकसभा चुनाव के दौरान हुए जानलेवा हमले के मामले में कोर्ट ने 20 साल बाद फैसला सुनाया था। इसमें तत्कालीन तृतीय अपर सेशन जज जितेंद्र कुमार शर्मा ने शाम सवा पांच बजे फैसला सुनाना शुरू किया और साढ़े पांच बजे कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मनोज त्रिवेदी सहित 11 आरोपियों को संदेह के आधार पर बरी कर दिया था, जिसमें एक अन्य आरोपी के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
बता दें कि फरवरी 1998 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान उमा भारती खजुराहो संसदीय क्षेत्र से बीजेपी की प्रत्याशी थीं। जहां 8 फरवरी की शाम चंद्रनगर में उमा पर हमला हुआ था, जिसमें 10वीं बटालियन एसएएफ डी कंपनी कैंप छतरपुर के एएसआई हरिओम प्रसाद लटौरिया घटना के दौरान उमा भारती के सुरक्षाकर्मी थे। हरिओम ने राजनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि दिन के करीब साढ़े तीन बजे तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशी उमा भारती जैसे ही आम रोड पर पहुंचीं, आरोपियों ने उनके वाहन के सामने जीप अड़ा दी और पथराव कर गोली चलाई थीं।
ये थे आरोपी...
वारदात के बाद उमा भारती जैसे ही चंद्रनगर चौकी के सामने पहुंचीं, उसी समय कांग्रेस के मनोज त्रिवेदी, अर्जुन सिंह, गोविंद सिंह, भगवानदास नामदेव, सलीम खान, हफीज उर्फ जमाल, रघुवीर प्रसाद, शहादत खान, संजीव राज, लखनलाल दुबे, शंकर नामदेव और फैयाज खान ने उमा भारती के गार्ड हरिओम लटौरिया पर पथराव करके गोलियां चलाईं। जांच के दौरान मामले के दो आरोपी अशोक कुमार और इदरीश की मौत हो गई है।
उमा भारती के वकील नारायण काले का कहना था, साल 1998 में जब वह मैहर जा रही थीं, तब चंदनगर में उन पर फायरिंग और पत्थरबाजी कर हमला किया गया था, जिसका मुकदमा चल रहा था। वह पहले भी कोर्ट मे बयान दे चुकी थीं और इसमें शेष आरोपियों को दोषमुक्त भी किया जा चुका है। वहीं, मामले का एक आरोपी फरार था, जिसकी गिरफ्तारी हुई थी और तकनीकी दृष्टिकोण से उसमें पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की गवाही आवश्यक थी। इसके चलते उमा भारती ने न्यायालय में उपस्थित होकर गवाही देने की रिक्वेस्ट की। कोर्ट ने उनकी रिक्वेस्ट स्वीकार करते हुए उनकी गवाही लेकर उन्हें गवाही देने से मुक्त कर दिया है।
गुजरात घटना पर दुःख व्यक्त...
वहीं, गवाही देने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने गुजरात के घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त किया और मृत आत्माओं को श्रद्धांजलि देते हुए परिजनों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने शराबबंदी को लेकर किए गए सवाल में कहा, साल से छह महीने मे मैं ऐसी हालत जरूर कर दूंगी की दहशत मे आ ही जाएंगे, अधिकारी हों या शासन प्रशासन। उन्होंने यह भी कहा, भय बिन प्रीत न होई गोसाईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसी नीति बने, जिससे शराब की दुकानें बंद हो जाएं। उन्होंने मीडिया के सवाल पर कहा, वे नहीं चाहती कि उनके आने पर दुकानें बंद हो जाएं और जाने के बाद दोबारा खुल जाएं। वे चाहती हैं कि दुकानें नीति के तहत बंद हों और खुल न सकें।
नशा मुक्ति अभियान की तारीफ...
उमा भारती ने सीएम शिवराज के नशा मुक्ति अभियान की तारीफ भी की और कहा मुख्यमंत्री हर मंच पर यह कह रहे हैं। नशे के खिलाफ लोगों को शपथ दिला रहे हैं। उमा भारती ने कहा, गंगा मेरी आराध्य हैं, शराब मेरी शत्रु, मोदी मेरे नेता हैं और बीजेपी मेरी पार्टी। जातिवाद को लेकर कहा, आज राष्ट्रवाद की लहर है। लेकिन जाति भी एक सच्चाई है और जब तक ये सच्चाई रहेगी, तब तक आरक्षण भी रहेगा। अभी भारतीय समाज इस सच्चाई से मुक्त नहीं हो पाया, लेकिन ये टकराव का कारण न बने। बल्कि सामाजिक समन्वय का कारण बने, जो बात मैंने की थी कि किसी भी वर्ग को ये नहीं लगना चाहिए। क्षेत्रीय संतुलन और जातीय संतुलन का ध्यान संगठन को भी और सरकार को भी रखना चाहिए। उसमें किसी जाति विशेष की पैरवी इंगित नहीं है। सबको साथ लेकर चलो, ताकि कोई भी अपने आपको वंचित न समझे।