बागेश्वर धाम में हवन करते पंडित धीरेंद्र शास्त्री।
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नरक चतुर्दशी के पावन अवसर पर बागेश्वर धाम में बालाजी हनुमान का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर बागेश्वर महाराज ने बालाजी के दरबार में पहुंचकर विधि-विधान से पूजन, अर्चन एवं हवन सम्पन्न किया।
18 दिवसीय कथा यात्रा के बाद लौटे महाराज श्री पुणे में 18 दिनों की कथा यात्रा पूर्ण कर बागेश्वर महाराज आज बागेश्वर धाम पहुंचे। नरक चतुर्दशी को दक्षिण भारत में बालाजी हनुमान के प्रगति उत्सव के रूप में मनाया जाता है, इसी उपलक्ष्य में यह विशेष आयोजन किया गया।
नरक चतुर्दशी और हनुमान पूजा का महत्व
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में हनुमान जन्मोत्सव माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमानजी को कलयुग के जीवित देवता और दसों दिशाओं के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। नरक चतुर्दशी की रात नकारात्मक शक्तियों की सक्रियता का समय मानी जाती है, इसलिए इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और साहस, शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
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19 से 26 अक्तूबर तक प्रतिदिन लगेगा दिव्य दरबार
बागेश्वर महाराज आज से 27 अक्तूबर तक बागेश्वर धाम पर ही विराजमान रहेंगे। 19 से 26 अक्तूबर तक प्रतिदिन दिव्य दरबार रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक आयोजित होगा। 24, 25 और 26 अक्तूबर को तीन दिवसीय श्री सत्यनारायण कथा प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक आयोजित की जाएगी। 27 अक्तूबर को बागेश्वर धाम पर विशाल गुरु शिष्य मिलन कार्यक्रम संपन्न होगा। इसके बाद महाराज श्री अपनी आगामी पदयात्रा की तैयारियों हेतु प्रस्थान करेंगे।