बाबा बागेश्वर ने की लोगों से अपील
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बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की 9 दिवसीय हिंदू सनातन एकता पदयात्रा का आज आठवां दिन था, और यह यात्रा निवाड़ी जिले के ओरछा तिगैला पहुँच गई। पदयात्रा का समापन शुक्रवार को रामराजा सरकार की नगरी ओरछा में होना है। यात्रा के समापन से पहले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक वीडियो जारी कर एक खास अपील की है। उन्होंने यात्रा में शामिल होने के इच्छुक श्रद्धालुओं से कहा कि पहले से ही लाखों की संख्या में लोग यात्रा में भाग ले रहे हैं, इसलिए जो लोग अभी यात्रा में शामिल होने का विचार कर रहे हैं, उन्हें वहीं रुकने की अपील की गई है और लाइव माध्यम से यात्रा में जुड़ने की सलाह दी गई है।
पंडित शास्त्री ने कहा कि बढ़ती भीड़ और यात्रा में आने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए यह अपील की जा रही है ताकि किसी को भी कोई असुविधा न हो। उन्होंने यात्रा के दौरान आने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया है, ताकि सभी श्रद्धालुओं को समुचित व्यवस्था और सुख-सुविधा मिल सके। पंडित शास्त्री ने अपनी बात में यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले लोग लाइव के जरिए यात्रा के साथ जुड़ सकते हैं और इसी से यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं।
यह अपील खासतौर पर यात्रा के समापन के समय, जब लाखों श्रद्धालु एकत्रित होने वाले हैं, की गई है ताकि और अधिक लोग यात्रा में बिना किसी परेशानी के जुड़ सकें और यात्रा का आनंद उठा सकें।
कई संत हुए साथ
बागेश्वर धाम से रामराजा सरकार की नगरी ओरछा तक करीब 160 किलोमीटर की सनातन हिन्दू एकता पदयात्रा लगातार आगे बढ़ रही है। आठवें दिन यह यात्रा ओरछा तिराहे पर ठहरी। बागेश्वर धाम के पीठधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने सभी पैदल चल रहे यात्रियों का उत्साह बढ़ाया। जिस तरह से लाखों लोग जात-पात मिटाकर सिर्फ हिंदुत्व के लिए पैदल निकल पड़े हैं उससे यह स्पष्ट हो रहा है कि इस पैदल यात्रा से कट्ट हिंदुत्व की चिंगारी निकली है। यह चिंगारी कब आग का रूप ले लेगी इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। पदयात्रा में देश के जाने-माने संतों के साथ-साथ राजनीति से जुड़े लोग भी शामिल हो रहे हैं। महाराजश्री ने कहा कि बिना सड़क पर निकले लोगों को एकजुट नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस तरह से अन्य मजहबों में कई जातियां होने के बावजूद जब धर्म की बात आती है तो सभी एकजुट हो जाते हैं। ठीक उसी तरह हमें भी अपने धर्म के लिए आपसी भेद-भाव, जात-पात, छुआ-छूत यह सब भूलना पड़ेगा।