शौचालय निर्माण के नाम पर रिश्वत लेने के मामले में छतरपुर जनपद की तत्कालीन ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी को अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई है। लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें 18 फरवरी 2020 को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। डीपीओ प्रवेश अहिरवार के अनुसार, नीलम तिवारी पर प्रत्येक शौचालय के एवज में 500 रुपये रिश्वत मांगने का आरोप था। शिकायत के बाद लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें रिश्वत लेते पकड़ा था। मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
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6 साल बाद आया फैसला
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद छतरपुर अदालत में न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने फैसला सुनाते हुए नीलम तिवारी को 3 साल के कारावास की सजा सुनाई। मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई के करीब छह साल बाद न्यायालय का फैसला आया है।
प्रत्येक शौचालय की मांगी 500 रुपये रिश्वत
डीपीओ प्रवेश अहिरवार ने बताया कि उक्त मामले में फरियादी जितेंद्र सिंह जो कि छतरपुर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत धौरी में रोजगार सहायक के पद पर पदस्थ था। उसने शिकायत की थी कि स्वच्छता अभियान के तहत बनने वाले शौचालय में से 13 शौचालय की फोटो उसने एप पर अपलोड कर दी थीं। फोटो अपलोड करने के बाद स्वच्छता अभियान की ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी का एप्रूवल जरूरी होता है। नीलम तिवारी प्रत्येक शौचालय के एप्रूवल के लिए 500 रुपये के हिसाब से 6500 रुपये की मांग कर रहीं थीं, जिसे उसने देने से मना कर दिया तो उन्होंने एप्रूवल नहीं दिया। इसकी शिकायत पर सागर लोकायुक्त ने उन्हें रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ़्तार किया था।
इसलिये मिल गई जमानत
डीपीओ प्रवेश अहिरवार ने बताया कि क्योंकि सजा तीन साल की हुई है। अतः उक्त मामले में आरोपी को तत्काल जमानत दे दी गई है। 389 में अपील का प्रावधान है निर्धारित समय में माननीय हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है। अगर निर्धारित समय पर अपील नहीं की जाती तो इसी सजा में जेल जाना पड़ेगा।