केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर चिता आंदोलन।
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मध्य प्रदेश के छतरपुर केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांव, रूंज, नैगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं तथा विस्थापितों की मांगों को लेकर जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहा चिता आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का आमरण अनशन बुधवार को 11वें दिन भी जारी रहा।
चिता पर लेटे हुए आंदोलनकारी।
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500 बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भूखे रहे
आंदोलनकारियों के अनुसार अनशन के दौरान उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है और अब तक करीब 6 किलो वजन कम हो चुका है। वहीं आंदोलन के समर्थन में बुधवार को भी आंदोलन स्थल पर चूल्हा नहीं जला, जिससे करीब 500 बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भूखे रहे।
चिता बनाकर एक पंक्ति में लेटी हुई महिलाएं।
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उचित पुनर्वास की मांग की तेज
आंदोलनकारियों का कहना है कि पिछले चार वर्षों से वे ग्राम सभाओं के आयोजन, पारदर्शी सर्वे, जनसुनवाई, आपत्तियों के निराकरण और उचित पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
जनसभा के दौरान आंदोलनकारी।
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पात्र परिवारों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला
विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि पात्र परिवारों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला, जबकि कई अपात्र लोगों को अधिक राशि दी गई। साथ ही बिचौलियों के खातों में मुआवजा पहुंचने और पुनर्वास प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए गए हैं।
चिता आंदोलन' की तपिश बढ़ी, अनशनकारी की बिगड़ती सेहत ने बढ़ाई चिंता।
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परियोजना में कथित भ्रष्टाचार का आरोप
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रत्येक विस्थापित परिवार को तीन एकड़ जमीन, कट-ऑफ डेट वर्ष 2026 तक बढ़ाना, परियोजना में कथित भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच तथा केन-बेतवा लिंक परियोजना के लाभ-हानि पर सार्वजनिक चर्चा और कानून के अनुरूप कार्रवाई शामिल है।
इंसाफ की मांग पर अड़े आंदोलनकारी।
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आंदोलनकारियों के साहस की सराहना
आंदोलन स्थल पर पहुंचे गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ गांधीवादी संतोष कुमार द्विवेदी ने आंदोलनकारियों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना जरूरी है।
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10 दिन से अन्न त्याग, 500 घरों में नहीं जला चूल्हा; फिर भी नहीं पिघला प्रशासन।
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गांधी स्मारक निधि की सचिव दयवंती बहन ने अहिंसक आंदोलन की परंपरा पर बल दिया। इस दौरान शहडोल से आए इस्त्याक भाई ने जनगीत प्रस्तुत किया, जबकि विवेक यादव और गोलू मिश्रा सहित अन्य वक्ताओं ने भी आंदोलन को संबोधित किया।
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