छतरपुर जिले के नौगांव थाना क्षेत्र के दौनी गांव में गुरुवार दोपहर करीब दो बजे बोरवेल में गिरी डेढ़ साल की दिव्यांशी कुशवाह अब ठीक है। घरवालों के साथ हंस-खेल रही है। लेकिन उसे बोरवेल से बाहर निकालने के पीछे बड़ा संघर्ष करना पड़ा। इसे बयां किया कलेक्टर संदीप जीआर ने।
छतरपुर कलेक्टर संदीप जीआर ने बताया हमें 3:40 और 4:00 बजे के आसपास मैसेज मिला कि बच्ची बोरवेल में फंसी हुई है। हम लोग तुरंत वहां पर गए। कंडीशन बहुत क्रिटिकल थी बोर 100 फीट का था, बच्ची 15 फिट पर जाकर फंसी हुई थी। इसमें चैलेंज यह था कि हम जो भी करें बड़ी सावधानी से करें और ज्यादा प्रेस न करें। कहीं बोरवेल धंस जाएगा तो बहुत बड़ी प्रॉब्लम आ सकती थी। बहुत केयरफुल रहकर हमें यह सब करना पड़ा।
हमारा समय अच्छा था
हम बच्ची दिव्यांशी को ऑक्सीजन सप्लाई कर रहे थे ताकि बच्चे को कोई नुकसान ना हो। समय के हिसाब से हम लोग प्लानिंग करते रहे और संसाधनों को जुटाया गया। हर समय हमारे लिए क्रिटिकल था लेकिन व्यवस्थाएं होती रही, हमारी टाइमिंग और टाइम अच्छा था, समय पर सब उपलब्ध होता गया। हैमर, ड्रिलर, JCB, वगैरह का तत्काल इंतज़ाम किया गया था।
परिवार में सिर्फ महिलाएं थीं
कलेक्टर ने बताया कि उनके परिवार में सिर्फ महिलाएं थीं, कोई पुरुष नहीं था। परिवार में पुरुष सब काम करने के लिए बाहर गए हुए थे। उन्हें संभालना भी जरूरी था। उन्हें मोटिवेट किया, भरोसा दिलाया। हमने उनके भरोसे को जीता सफलता हासिल की। समकक्ष गहराई तक पहुंचने के बाद बड़ी सावधानी बरतनी पड़ी, क्योंकि यह हमारा लास्ट चांस था कि अगर जरा-सी भी चूक जो जाती तो बच्ची और नीचे जा सकती थी। लास्ट मूवमेंट में ज़ब 1 फीट ही गैप था तब बहुत केयरफुली रहना पड़ा। अगर थोड़ा बहुत भी यहां-वहां हो जाता तो बच्ची और नीचे चली जाती और फिर सब हमारे लिए उसे बचा पाना बहुत मुश्किल हो जाता।
रूट क्लियर कर ग्रीन कॉरिडोर बनाया था..
हम लोगों ने पहले से प्लानिंग कर ली थी। लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस बुला ली थी। एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम बना लिया था। रूट को भी क्लियर कर ग्रीन कॉरिडोर बना कर रखा था। अगर आवश्यकता पड़ती तो डॉक्टर्स की टीम मौके पर भी मौजूद थी। चूक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी थी। एडवांस लाइफ सपोर्ट, एंबुलेंस, डॉक्टर सभी तैयार थे। मौके पर भी डॉक्टर से अगर बच्ची को इमरजेंसी फर्स्ट ट्रीटमेंट करना पड़ता तो भी तैयार थे। बोरवेल में रहने से ऑक्सीजन की कमी लाजमी है जिसे प्रॉपर दिया गया।
कलेक्टर ने की लोगों से अपील
हम लोगों को संदेश देना चाहेंगे कि इस तरह के ओपन बोर को बंद करके रखें। उन्हें तत्काल बंद करना चाहिए। उसके लिए हम एक आदेश भी निकाल रहे हैं, जिसे हम हमारे अधिकारी रेंडमली चेक भी करेंगे।
बच्ची और उसकी मां से अस्पताल जाकर मिले कलेक्टर
कलेक्टर ने बताया कि मैं बच्ची और उसकी मां से मिला। उसकी मां कॉन्फिडेंट है और बच्ची भी अच्छी है। लड़की बहुत हिम्मतवाली है कि इन परिस्थितियों में उसने खुद को ढाले रखा, वरना ऐसे में कोई नॉर्मल आदमी को भी डाल दें तो वह उसके पसीने छूट जाएं।
दिव्यांशी की मां ने बताया आंखों देखा हाल..
बच्ची की मां रामसखी ने बताया कि मेरी तीन बेटियां हैं और सबसे छोटी बेटी 13 माह की दिव्यांशी बोरवेल में गिर गई थी। घटना उस समय की है जब मैं बोर को बंद कर रही थी।
गड्ढा 100 फीट था भरते-भरते 15 फीट बचा था
दरअसल हमारा बोर 100 फीट गहरा था, जो सूखा था। जिसे मैं भर रही थी जो कि भरते-भरते 15 फीट ही बचा था। उसी दौरान मैं बच्ची को बोर से दूर बिठाकर खेत में पानी लगाने के लिए चली गई। इसी बीच वह बोर के पास चली गई और उसमें गिर गई। बड़ी बेटी ने बताया कि वह बोर में गिर गई तो मैंने गांव के सरपंच प्रधान और परिचितों को बताया। जहां सरपंच ने कलेक्टर और पुलिस को बताया। JCB मशीन आई, मशीनों ने खुदाई की और हमारी बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला।
बोरवेल से दिव्यांशी बोली मम्मी आ जाओ और रोने लगी
मैंने दिव्यांशी से बोर के अंदर बात की कि दिव्यांशी अच्छी हो तो वह बोली मम्मी आ जाओ और रोने लगी। शासन प्रशासन ने बोर के अंदर दूध, पानी, ऑक्सीजन सब सप्लाई की थी।