मध्य प्रदेश के सीहोर के जिला अस्पताल में बच्चा बदलने का मामला अभी पूरी तरह से सुलझा भी नहीं है कि पांच दिन पहले जन्म लेने वाली बच्ची ने वेंटीलेटर पर सोमवार को अंतिम सांस ली। परिजन डीएनए टेस्ट कराने पर अड़े हुए थे। बच्ची की मौत होने पर परिवार वाले आए और शव लेकर रवाना हो गए। मालूम हो कि परिजनों ने जन्म के बाद बच्ची को ये कहते हुए लेने से मना कर दिया था कि उन्हें बेटा हुआ था, उन्हें किसी और की बच्ची को थमाया जा रहा है।
दंपत्ति का आरोप था कि 22 दिसंबर को अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था, जिसे एसएनसीयू वार्ड में रखा था। शनिवार को घर जाने लगे तो बेटी लाकर दे दी थी। जिसे उन्होंने लेने से मना कर दिया था, तभी से बच्ची जिला अस्पताल में भर्ती थी, जिसकी सोमवार रात मौत हो गई।
पुलिस में की थी शिकायत
सिविल सर्जन डॉ. अशोक मांझी ने बताया कि मूड़लाकलां गांव की रहने वाली सलमा पत्नी सद्दाम खां को 22 दिसंबर को सुबह 9.45 बजे नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। वहीं स्टाफ नर्स का कहना था कि बच्ची ने गर्भ में गंदा पानी पी लिया था, इसलिए उसे एसएनसीयू में भर्ती करने भेज दिया था। शनिवार सुबह उनकी छुट्टी के समय परिजन कहने लगे कि हमारा बेटा है, किसी और की बेटी वे नहीं लेंगे। इस मामले में परिजनों से सिविल सर्जन और पुलिस को शिकायत की थी। सिविल सर्जन डॉ. अशोक मांझी का कहना है कि बच्ची को मिकोनियल हो गया था। यानी गर्भ में ही उसने गंदा पानी पी लिया था, जिस कारण बच्ची बीमार हो गई थी। यही उसकी मौत की वजह बनी। परिवार को कुछ गलतफहमी हो गई थी, समझाने पर वे मान गए।