बुरहानपुर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर आदिवासी ब्लॉक धुलकोट क्षेत्र बोरी बुजुर्ग में पुरानी परंपरा आज भी जारी है। यहां के लोग पुलिस थाना, कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पर भरोसा नहीं रखते। कोई भी झगड़ा, विवाद बरेला आदिवासी समाज में होता है तो समाज की पंचायत में ही फैसला हो जाता है। आज भी इस आधुनिक युग में पुरानी रीति रिवाजों से ही लड़ाई -झगड़ों का निपटारा किया जा रहा है।
दरअसल बुरहानपुर जिले के आदिवासी ब्लॉक में बड़ी संख्या में बारेला रहता है। समाज में विवादों को सुलझाने के लिए समाज के पंचगण एकत्रित होते हैं और पंचायत में ही विवाद करने वाली दोनों पार्टियों के हाथों मे समाज कै पटेल द्वारा पतली लकड़ी दी जाती है। दोनों पार्टी लकड़ी को तोड़ देती है। एवं एक दूसरे के पैर छूकर एवं हाथ जोड़कर विवाद को वहीं पर खत्म कर देती है। उसके बाद पंचायत में शामिल समाजजनों को विवाद सुलझने के बाद सेव, नमकीन बांटा जाता है। यह परंपरा आदिवासी बारेला समाज में आज भी जीवंत है। समाज के लोगों का कहना है कि पंचायत बुलाकर विवादों को निपटा दिया जाता है। पुलिस और कोर्ट के पास जाने में समय और पैसों की बर्बादी होती है।