खंडवा-खरगोन सीमा पर इंदौर-इच्छापुर फोरलेन परियोजना के तहत बासवा नदी पर बन रहा 1100 करोड़ रुपये का पुल यातायात शुरू होने से पहले ही क्षतिग्रस्त हो गया। सरिए बाहर आने पर ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए, जबकि NHAI ने जांच के आदेश दिए हैं।
खंडवा-खरगोन सीमा पर निर्माणाधीन इंदौर-इच्छापुर फोरलेन परियोजना में गंभीर निर्माण खामी सामने आई है। करीब 3900 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत बासवा नदी पर बन रहे लगभग 1100 करोड़ रुपये लागत वाले पुल का एक हिस्सा यातायात शुरू होने से पहले ही क्षतिग्रस्त हो गया। पुल के स्लैब में गड्ढा बन गया है और उसमें इस्तेमाल किए गए लोहे के सरिए बाहर दिखाई देने लगे हैं।
ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है। उनका आरोप है कि पुल पर केवल चार इंच मोटा स्लैब डाला गया है और 10 एमएम के सरियों की दोहरी लेयर का उपयोग किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस पुल से भारी वाहनों का आवागमन शुरू हुआ तो बड़ा हादसा हो सकता है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षति सामने आने के बाद निर्माण कंपनी ने जल्दबाजी में दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी और टूटे हिस्से को तिरपाल से ढक दिया। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि निर्माण में हुई खामियों को छिपाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
इंदौर-इच्छापुर नेशनल फोरलेन परियोजना खंडवा, खरगोन और बुरहानपुर जिलों से होकर गुजर रही है। ऐसे में परियोजना की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुल अभी शुरू भी नहीं हुआ और उसकी यह हालत है, तो भविष्य में इसकी मजबूती और सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।
मामले पर NHAI के खंडवा प्रभारी आशीष बिरला ने कहा कि इसे पुल धंसने की घटना नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह निर्माण संबंधी तकनीकी समस्या है। उन्होंने बताया कि इंजीनियरों की टीम से जांच कराई जा रही है और तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक इंतजाम कर दिए गए हैं और सुधार कार्यों की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि भारी सरियों का पुल के जॉइंट में फंस जाने के कारण एक ओर का हिस्सा प्रभावित हुआ, जिससे सीमेंट का कुछ भाग धंस गया। कंपनी का दावा है कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है और किसी प्रकार का कोई संरचनात्मक खतरा नहीं है। प्रभावित हिस्से की मरम्मत कर दी जाएगी। एहतियात के तौर पर सभी मार्गों पर बैरिकेडिंग कर भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।
202 किलोमीटर लंबी है महत्वाकांक्षी परियोजना
इंदौर-खंडवा-इच्छापुर-एदलाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य जारी है। लगभग 202 किलोमीटर लंबी यह सड़क मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने वाली एक प्रमुख परियोजना मानी जा रही है।
परियोजना के तहत सैकड़ों पुल-पुलियाओं और बड़े ब्रिजों का निर्माण किया जा रहा है। करीब पांच वर्षों से निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन अभी तक पूरी परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी है। निर्माण कंपनियों को कई बार समय-सीमा में विस्तार भी दिया गया है।
मोरटक्का के सिक्स लेन नर्मदा पुल को लेकर भी बढ़ी चिंता
ओंकारेश्वर से लगभग 12 किलोमीटर दूर मोरटक्का में नर्मदा नदी पर करीब सवा किलोमीटर लंबा छह लेन पुल भी इसी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लगभग बनकर तैयार हो चुका है। बासवा पुल की स्लैब धंसने की घटना के बाद लोगों के मन में अन्य पुलों और संरचनाओं की गुणवत्ता को लेकर भी आशंकाएं बढ़ गई हैं।
श्रद्धालु अब भी पुराने मार्ग पर निर्भर
परियोजना अधूरी होने के कारण ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को अभी भी पुराने मार्ग का उपयोग करना पड़ रहा है। विशेष अवसरों और धार्मिक पर्वों के दौरान इस मार्ग पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
गुणवत्ता परीक्षण की उठी मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यातायात शुरू होने से पहले ही पुल की स्लैब में इस तरह की समस्या सामने आ रही है, तो परियोजना के सभी पुलों, पुलियाओं और सड़क निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। भविष्य में किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।