इंदौर के प्रभागीय आयुक्त संजय दुबे ने बताया कि राज्य के मंदसौर जिला की रहने वाली अर्चना दोसी पिछले कुछ दिनों से मस्तिष्क में रक्त स्त्राव की समस्या से जूझ रही थीं। वह 23 जुलाई से इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। डॉक्टरों ने 25 जुलाई को अर्चना को ब्रेन डेड घोषित कर दिया था।
इसके बाद अर्चना के परिवार को अंगदान के बारे में जानकारी दी गई। जिसके बाद परिवार अर्चना के अंगदान के लिए तैयार हो गया। अर्चना के हृदय, लीवर और दोनों किडनियों को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से शहर के ही तीन अस्पतालों में पहुंचाया गया।
जहां यह अंग चार जरूरतमंद मरीजों को ट्रांसप्लांट कर दिया गया। अर्चना की आंख और त्वचा को भी दान के लिए संरक्षित किया गया है। इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के अधिकारियों के मुताबिक, इंदौर में पिछले 21 महीनों में 23 ब्रेन डेड मरीज अंगदान कर चुके हैं।