इन ग्यारह सीटों में गुना, सागर, खजुराहो, रीवा, सीधी, छिंदवाड़ा, विदिशा, भोपाल, राजगढ़, देवास और रतलाम शामिल हैं। रीवा से जनार्दन मिश्रा और सीधी सीट से रीति पाठक पहली सांसद बने हैं। इस बार इन दोनों सीटों पर कांग्रेस की ओर से दमदार चेहरे अजय सिंह, पुष्पराज सिंह, सुंदरलाल तिवारी के लड़ने की चर्चा है।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रतलाम और शहडोल सीट दमदार नेता दिलीप सिंह भूरिया व दलपतसिंह परस्ते के कारण कांग्रेस से छीनी थी। अब यह दोनों ही नेताओं का निधन हो चुका है। पार्टी रतलाम में नए चेहरे की तलाश कर रही है क्योंकि दिलीप सिंह के निधन के बाद कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने उपचुनाव में यह सीट भाजपा से छीन ली थी। हालांकि पार्टी शहडोल में पूर्व मंत्री ज्ञान सिंह पर फिर से दांव लगा सकती है।
विदेश मंत्री और विदिशा से सांसद सुषमा स्वराज के चुनावी जंग में उतरने से मना करने के बाद माना जा रहा है कि पार्टी यहां से सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उम्मीदवार बना सकती है। भोपाल सीट पर भी बदलाव की खबरें आ रही हैं पार्टी यहां से किसी बाहरी को खड़ा कर सकती है। हालांकि सहमति नहीं बनने पर उमाशंकर गुप्ता को चेहरा बनाया जा सकता है। भोपाल से आलोक संजर सांसद हैं।
भाजपा की मुश्किलें इन सीटों पर बढ़ी
विधानसभा चुनाव में राजगढ़, छिंदवाड़ा में कांग्रेस को मिली सफलता ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सागर में भाजपा सांसद लक्ष्मीनारायण यादव की उम्र 74 साल हो गई है। हाल ही में उनका बेटा विधानसभा का चुनाव हारा है। उज्जैन सीट पर 2014 में कांग्रेस के उम्मीदवार रहे प्रेमचंद गुड्डू विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उन्हें चिंतामणि मालवीय ने हराया था। इस सीट को लेकर दोनों नेताओं के दावे से पेंच फंसता दिख रहा है। थावरचंद गहलोत के चुनावी जंग में उतरने पर इस सीट से उनका भी दावा हो सकता है।
इसके अलावा धार, खरगौन और मंदसौर संसदीय सीट को लेकर भाजपा फीडबैक का इंतजार कर रही है। यहां भाजपा की ओर से पहली बार के सांसद क्रमश: सावित्री ठाकुर, सुभाष पटेल व सुधीर गुप्ता हैं।