मध्य प्रदेश में पिछले कई दिनों से जारी आंधी-बारिश का दौर थमने के बाद अब रात की ठंडक बढ़ने लगी है। प्रदेश के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री तक पहुंच गया है। मौसम में बदलाव का असर दिन के तापमान पर भी दिखने लगा है। भोपाल समेत कई शहरों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले चार दिन तक प्रदेश में कहीं भी आंधी या बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। इस दौरान रात के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक गिरावट होने का अनुमान है।
अमरकंटक सबसे ठंडा, कई शहरों में रात का पारा गिरा
प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट के साथ ठंडक का अहसास बढ़ने लगा है। बीती रात अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कटनी के करौंदी में पारा 13.1 डिग्री रहा। दमोह में न्यूनतम तापमान 14.5 डिग्री, शाजापुर में 15.6 डिग्री और नीमच के मरुखेड़ा, रीवा व उमरिया में 15.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में रात के साथ दिन के तापमान में भी गिरावट हो सकती है। ऐसे में सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ने के आसार हैं।
बारिश थमी, अब चार दिन मौसम साफ रहने का अनुमान
पश्चिमी मध्य प्रदेश में पिछले आठ दिन से सक्रिय बारिश का दौर अब थम गया है। चक्रवाती परिसंचरण के असर से इंदौर और उज्जैन संभाग में ज्यादा बदलाव देखने को मिला था। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों में तेज बारिश हुई, जबकि कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी दर्ज की गई। दूसरी ओर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में धूप खिली रही। शुक्रवार को भी इंदौर संभाग के आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर और खंडवा सहित हरदा व बैतूल में कहीं बादल छाए रहे तो कहीं हल्की बूंदाबांदी हुई। अब अगले चार दिन तक आंधी-बारिश की चेतावनी नहीं है।
भोपाल समेत कई शहरों में दिन का पारा 35 डिग्री से नीचे
दिन के तापमान में भी 1 से 2 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई है। भोपाल के अलावा खजुराहो, रतलाम, गुना, खरगोन, खंडवा, छतरपुर, ग्वालियर, बालाघाट, राजगढ़, उज्जैन, मंडला और सागर में अधिकतम तापमान 35 डिग्री से नीचे बना हुआ है। दिन में तेज गर्मी से राहत मिलने के साथ रात का तापमान गिरने से मौसम में दोहरा बदलाव महसूस हो रहा है। हालांकि, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में एक नए मौसम तंत्र के सक्रिय होने से उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश में फिर बारिश का असर दिख सकता है। ऐसे में फिलहाल मिली राहत के बाद महीने के अंतिम दिनों में मौसम दोबारा बदलने की संभावना है।
मानसून लौट चुका, फिर भी अक्टूबर में बारिश का सिलसिला
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो गई थी। इसके बावजूद अलग-अलग मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बारिश होती रही। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह के मौसम का असर देखने को मिलता है। इस बार भी इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। इस वर्ष मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा। जून से सितंबर के बीच प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश हुई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।
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पूर्वी हिस्से में ज्यादा, पश्चिमी मध्य प्रदेश में कम बारिश
मानसून के दौरान प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी गिरा। जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन मानसून में आए दो ब्रेक के कारण जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो गया, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में कमी अधिक रही। ऐसे में अक्टूबर में हो रही बारिश कुछ क्षेत्रों के लिए राहत दे सकती है, लेकिन प्रदेश में मानसून की कुल कमी पूरी होने की स्थिति जिलेवार बारिश पर निर्भर करेगी।