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विक्रमोत्सव 2025: लाल किले पर शुरू हुआ तीन दिवसीय महोत्सव, जानें क्यों उपराष्ट्रपति ने CM यादव को कहा 'मनमोहक'

Sat, 12 Apr 2025 08:08 PM IST
शबाहत हुसैन डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आज से (12 अप्रैल) से लेकर 14 अप्रैल तक “विक्रमोत्सव 2025” का भव्य आयोजन किया जा रहा है। आज उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस भव्य आयोजन का शुभारंभ किया। पहले दिन सम्राट विक्रमादित्य के नाट्य की प्रस्तुति दी गई। 

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मंच पर मौजूद उपराष्ट्रपति, सीएम मोहन यादव व दिल्ली की सीएम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश की राजधानी दिल्ली में लाल किले पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के तीन दिवसीय मंचन की शुरुआत शनिवार शाम से हो गई है। पहले दिन कार्यक्रम का शुभारंभ उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, मप्र के राज्यपाल मंगू भाई पटेल, सीएम डॉ. मोहन यादव, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। इस दौरान मध्यप्रदेश सरकार के मंत्रियों के अलावा दिल्ली सरकार के मंत्री भी मौजूद थे। इसके अलावा दिल्ली भाजपा के नेता समेत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। लाल किले पर 13 और 14 अप्रैल को भी चलने वाले इस नाट्य मंचन में महान सम्राट विक्रमादित्य, विक्रम संवत और देश के गौरवशाली इतिहास में उनके योगदान से दर्शकों को अवगत कराया जाएगा।

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इस आयोजन का उद्देश्य सम्राट विक्रमादित्य की ऐतिहासिक विरासत और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को आमजन तक पहुंचाना है। इस “महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य” में उनके जन्म से लेकर सम्राट बनने तक की गाथा को 125 कलाकारों और 50 से अधिक सहायक दल के साथ प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति को भव्यता देने के लिए रथ, अश्व, पालकी, ऊंट के साथ-साथ एलईडी ग्राफिक्स और तीन स्टेज का प्रयोग गया।
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पढ़ें: विक्रमोत्सव 2025: दिल्ली के लाल किले से गूंजेगा सम्राट विक्रमादित्य का यशोगान, आज उपराष्ट्रपति करेंगे शुभारंभ

हमारी सांस्कृतिक विरासत पांच हजार साल पुरानी: जगदीप धनखड़
इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि मन प्रफुल्लित है, एक लंबे अंतराल के बाद भारत ने एक नए युग में प्रवेश किया है। आर्थिक संपन्नत दुनिया के संस्थाओं की प्रशंसा, संस्था के ढांचे में भारी बढ़ोतरी जब भारत विकास में  इतना आगे बढ़ रहा है, देश हमारा महाशक्ति बनकर उभर रहा है और दुनिया की नजर जब भारत पर है तो स्वाभाविक है सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रति हमारा लगाव बढ़ना चाहिए।



उन्होंने कहा कि कोई देश इस दुनिया में नहीं है, नजदीक तक नहीं आता, जिसकी सांस्कृतिक विरासत पांच हजार साल पुरानी हो। ऐसी परिस्थिति में आज का कार्यक्रम भारत में कल्चरल सेंट्रल ऑफ द वर्ल्ड वहां ये कार्यक्रम होना हमारे युग जिनके 10 साल के अंदर प्रगति हुई है। उसकी वजह से जो भारी बदलाव आया है, एक सुखद संकेत है। जगदीप धनखड़ ने कहा कि हर्षोउल्लास से हम ओतप्रोत है महान विक्रमादित्य के नाम से…न्याय के प्रतीक, शासन व्यवस्था उत्कृष्ट हो और कितना अच्छा लगता है, जो मापदंड सम्राट विक्रमादित्य ने रखे थे, आज वो जमीनी हकीकत बनकर उभर रहे है। 

सीएम यादव को उपराष्ट्रपति ने बताया 'मनमोहक'
इस दौरान उपराष्ट्रपति ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भी विशेष सराहना की। उन्होंने कहा, आप सिर्फ नाम से नहीं, हर दृष्टि से मनमोहक हैं। आपने दिल्ली के दिल पर असर छोड़ा है। आपकी सांस्कृतिक सोच और नाट्य प्रेम इस आयोजन में झलकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही यमुना रिवर फ्रंट पर ऐसा ही आयोजन देखने को मिलेगा। दिल्ली वालों को अब संस्कृति का चस्का लगने वाला है।



इस संस्कृति का अंत नहीं हो सकता: सीएम मोहन यादव
इस दौरान मप्र के सीएम मोहन यादव ने कहा कि लाल किले का ये प्रांगण और इतना सुखद संयोग है कि इस ऐतिहासिक किले के एक-एक पत्थर की इमारत भारत के गौरवशाली अतीत के लिए सीना ताने खड़ी है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, जिसके कारण से गौरवान्वित होता है, ऐसे यशस्वी भारत माता की ये राजधानी और दुनिया के सबसे सक्षम जनतांत्रिक देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पधारे हैं, मैं उनका आभारी हूं। सीएम ने कहा कि ये हमारे लिए सौभाग्य की बात है जब आक्रांताओं ने भारत की मान मर्यादा के लिए लोक-लालच से संस्कृति को अलग प्रकार से देखने के कारण हर काल में इस संस्कृति को चुनौती दी। हम भाग्यशाली है और सौभाग्यशाली है, हमारे वीरों ने अपने इस काल को हमेशा भारत की आन बान शान को लगा करके दुनिया के सामने उस तथ्य को स्थापित किया और इसी लिए कहा गया है कि इस संस्कृति का अंत नहीं हो सकता है। 

आज का दिन खास है: सीएम रेखा गुप्ता
कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताते हुए कहा कि, मैं सीएम यादव के प्रति धन्यवाद प्रकट करना चाहती हूं, जिन्होंने इतना भव्य आयोजन दिल्ली में किया और दिल्ली वासियों को समृद्ध भारतीय संस्कृति, उज्जैन की गुफाएं और सम्राट विक्रमादित्य जैसे गौरवशाली महानायक को नजदीक से जानने और देखने का अवसर दिया। जब तक हम अपने सीमित दायरे से बाहर निकलकर अपने अतीत, परंपरा और ऐतिहासिक नायकों को नहीं जानेंगे, तब तक आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान को समझाना मुश्किल होगा। सम्राट विक्रमादित्य जैसे शूरवीर, जो रात में वेश बदलकर जनता के बीच निकलते थे, आज भी शासन प्रणाली के लिए आदर्श बने हुए हैं।
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भारत के स्वर्णिम युग का उत्सव: गजेंद्र सिंह शेखावत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, यह केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारत के उस स्वर्णिम युग का उत्सव है, जिसने न्याय, संस्कृति, विज्ञान और धर्म के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। सम्राट विक्रमादित्य ऐसे आदर्श शासक थे, जिन्होंने सिद्ध किया कि राजा वही होता है जो प्रजा के हित में जिए और न्याय को सर्वोपरि रखे। उनके दरबार में महाकवि कालिदास, खगोलशास्त्री वाराहमिहिर और वैद्य धन्वंतरि जैसे नवरत्न थे, जो भारत की सांस्कृतिक उत्कृष्टता के प्रतीक हैं।

पहले दिन कुर्सियां रहीं खाली,दर्शक भी होते रहे परेशान
हालांकि, राजधानी दिल्ली में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले दिन अपेक्षा के मुताबिक लोग कम पहुंचे। कुछ वीआईपी जरूर नजर आए, लेकिन  मंच पर अतिथियों के भाषण खत्म होने के बाद वे भी कार्यक्रम स्थल से रवाना हो गए। दिल्ली में हो रहे इस कार्यक्रम के लिए भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी कुछ संस्थाओं के साथ मध्यप्रदेश सरकार के पर्यटन संस्कृति विभाग की थी। एमपी सरकार ने इस भव्य आयोजन के लिए मीडिया के अलावा दिल्ली में कई बड़ी जगहों पर होर्डिंग लगाकर लोगों को इसकी जानकारी दी थी। शनिवार और हनुमान जयंती के छुट्टी के बावजूद कार्यक्रम स्थल पर लोगों की भीड़ कम रही। पहले दिन एमपी का फूड कोर्ट भी खाली ही नजर आया, जबकि दूसरी तरफ कुछ लोग जो महानाट्य मंचन देखने आए उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सरकार ने लोगों के लिए पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की थी। इसके अलावा चांदनी चौक क्षेत्र में हनुमान जयंती की शोभायात्रा के कारण भी सड़क पर जाम लगा रहा। इससे भी लोगों को कार्यक्रम स्थल पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।  

एमपी के जायके साथ महाकाल के भी हो रहे दर्शन
लाल किले पर विक्रमादित्य और अयोध्या, विक्रमादित्य कालीन पुरातात्विक मुद्रा मुद्रांक, वृहत्तर भारत के सांस्कृतिक वैभव, मध्यप्रदेश में पर्यटन की संभावनाओं, प्रदेश में निवेश और रोजगार सृजन के अवसरों में लोकव्यापीकरण के प्रयासों पर केंद्रित प्रदर्शनियां भी लगाई गई है। इसके अलावा मध्यप्रदेश टूरिज्म विभाग की तरफ से परिसर स्थल में फूड कोर्ट भी लगाया है। यहां आने वाले दर्शक मध्यप्रदेश के स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी चख सकेंगे। परिसर स्थल में ही पर्यटन विभाग की प्रमुख पहल, नवाचारों और पर्यटन सर्किट की जानकारी दी जा रही है। वहीं यहां आने वाले लोगों को तकनीक की सहायता से नागरिकों को ऐतिहासिक कथाओं को जानने का अवसर भी प्राप्त हो रहा है। यहां बाबा महाकाल का होलोग्राफिक भी प्रदर्शित किया गया है।

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