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त्विषा केस: 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए समर्थ और गिरिबाला, जांच में उठे नए सवाल

Tue, 02 Jun 2026 01:49 PM IST
भोपाल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

 त्विषा शर्मा मृत्यु प्रकरण में सीबीआई ने पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके पुत्र समर्थ सिंह की रिमांड बढ़ाने की मांग नहीं की, जिसके बाद दोनों को भोपाल की सीजेएम अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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त्विषा शर्मा केस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चर्चित त्विषा शर्मा मृत्यु प्रकरण की जांच में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले में गिरफ्तार पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके पुत्र समर्थ सिंह की रिमांड बढ़ाने की मांग नहीं की। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद दोनों आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए। मामले में आरोपी त्विषा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस बीच जांच के दौरान कई नए तथ्य सामने आए हैं, जिनमें साक्ष्य संरक्षण में कथित लापरवाही का मामला भी शामिल है।

रिमांड के दौरान कई दौर की पूछताछ

सीबीआई सूत्रों के अनुसार रिमांड अवधि के दौरान गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह से कई चरणों में विस्तृत पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने उनसे घटना के विभिन्न पहलुओं को लेकर सवाल किए और उनके बयानों को रिकॉर्ड किया। हालांकि दोनों आरोपियों ने अपने ऊपर लगाए गए मारपीट, प्रताड़ना और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोपों से इनकार किया है। उनका दावा है कि त्विषा शर्मा के साथ उनके संबंध सामान्य थे और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। सीबीआई अब आरोपियों के बयानों का उपलब्ध तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के साथ मिलान कर रही है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

घटनाक्रम का कराया गया रीक्रिएशन

जांच के दौरान सोमवार को पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन भी कराया गया। जांच एजेंसी का उद्देश्य घटना के समय मौजूद परिस्थितियों को समझना और आरोपियों द्वारा किए जा रहे दावों की सत्यता का परीक्षण करना था। इसके साथ ही घटनास्थल से जब्त किए गए साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच भी जारी है। जांच एजेंसियां रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं, जिससे मामले की कई अहम कड़ियां जुड़ सकती हैं।

साक्ष्य संरक्षण में कथित लापरवाही ने खड़े किए सवाल

मामले की जांच के दौरान एक गंभीर प्रक्रियागत चूक भी सामने आई है। जांच में पता चला है कि जिस लिगेचर बेल्ट के सहारे त्विषा शर्मा फंदे पर लटकी मिली थीं, उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तत्काल सुरक्षित नहीं किया गया था। आरोप है कि घटनास्थल से बरामद यह महत्वपूर्ण साक्ष्य जांच अधिकारी द्वारा तत्काल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजने के बजाय करीब दो दिन तक अपनी निजी कार में रखा गया। इतना ही नहीं, पोस्टमार्टम के दौरान भी इस बेल्ट को एम्स अस्पताल में जमा नहीं कराया गया था। साक्ष्य संरक्षण में हुई इस कथित लापरवाही ने जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब यह जांच का एक अहम पहलू बन गया है।

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संबंधित पुलिस अधिकारी से हो सकती है पूछताछ

सूत्रों के मुताबिक सीबीआई अब इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारी से पूछताछ की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी जल्द ही उन्हें नोटिस जारी कर सकती है। इसके अलावा मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों को भी पूछताछ के लिए तलब किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सीबीआई यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साक्ष्य संरक्षण में हुई कथित चूक लापरवाही थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।

त्विषा के परिवार की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग

त्विषा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे ने कहा कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और परिवार शुरू से ही निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग करता रहा है। उन्होंने कहा कि घटना के समय घटनास्थल पर केवल तीन लोग मौजूद थे। इनमें से एक, त्विषा शर्मा, अब इस दुनिया में नहीं हैं। ऐसे में केवल दो जीवित व्यक्ति ही जानते हैं कि वास्तव में उस समय क्या हुआ था। अधिवक्ता ने कहा कि जांच एजेंसी को मामले के हर पहलू की गहराई से जांच करनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो सके।

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