साल 2018 की गणना के अनुसार, मध्यप्रदेश में 526 बाघ थे। राष्ट्रीय बाघ गणना हर चाल साल में एक बार की जाती है। साल 2021 में मध्यप्रदेश में 42 बाघों की मौत हुई थी। हालांकि, साल 2021 की तुलना में बाघों की मौत का आंकड़े मध्यप्रदेश में घटे हैं, लेकिन साल 2022 में 34 बाघों की मौत फिर भी चिंताजनक है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्यप्रदेश में सालाना लगभग 250 शावक पैदा होते हैं। प्रदेश में छह बाघ अभ्यारण्य हैं, इनमें कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और संजय डुबरी है।
10 साल में 270 टाइगरों की मौत...
मध्यप्रदेश में टाइगरों की सुरक्षा की बात कही जाती है, लेकिन प्रदेश में बाघों की कितनी सुरक्षा होती है, NTCA के आंकड़े इसकी पोल खोलते हुए नजर आ रहे हैं। मध्यप्रदेश में पिछले 10 साल में जुलाई 2022 से अब तक 270 टाइगरों की मौत हो चुकी है। इनमें भी सबसे ज्यादा 66 टाइगरों की मौत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में दर्ज की गई है। ऐसे में बाघों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले साल ही दोबारा से मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला था, लेकिन टाइगरों की मौत के मामले में भी मध्यप्रदेश सबसे आगे है।
बाघों पर भी ध्यान देना होगा...
बता दें कि अब मध्यप्रदेश को चीता राज्य के रूप में भी देखा जाने लगा है। 52 साल पहले बिलुप्त हुए चीते फिर बसाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आठ चीते मध्यप्रदेश के कूनों में छोड़े गए थे। 18 फरवरी को 12 नए चीते दक्षिण अफ्रीका से लाए गए।