शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना
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अध्यापकों का अनिश्चितकालीन आंदोलन पांचवें दिन भी जारी रहा। राजधानी के नीलम पार्क में चल रहे धरने में गुरुवार को रीवा और शहडोल संभाग के बड़ी संख्या में शिक्षकों ने पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शिक्षक अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। अब आंदोलन को गांधी जयंती पर प्रदेशभर में विस्तार देने की तैयारी है। 2 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर शिक्षक उपवास और सत्याग्रह करेंगे। शिक्षक महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे और संबंधित अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे।
तीन मांगों पर सरकार से आर-पार की मांग
शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांगों में प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना कर वरिष्ठता, पुरानी पेंशन सहित सभी सेवा लाभ देने, अध्यापक संवर्ग के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और शिक्षकों पर लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था खत्म करने की मांग शामिल है। मोर्चा सदस्य और शिक्षक नेता उपेन्द्र कौशल ने कहा कि गांधी जयंती पर होने वाला उपवास और सत्याग्रह शिक्षकों की लंबित मांगों को सरकार तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से पहुंचाने का कार्यक्रम है। उन्होंने प्रदेशभर के शिक्षकों से जिला मुख्यालयों पर बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।
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भोपाल में इंदौर के शिक्षक भी जुटेंगे
मोर्चा के मुताबिक, भोपाल में होने वाले उपवास-सत्याग्रह में इंदौर संभाग के साथ भोपाल के शिक्षक भी नीलम पार्क में शामिल होंगे। इस दौरान सरकार से शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाने और तीनों मांगों पर पहल करने की मांग की जाएगी। मोर्चा के संयोजक मंडल में शामिल जगदीश यादव, मनोहर दुबे, राकेश दुबे, परमानंद डेहरिया, राकेश नायक, डीके सिंगौर और राकेश पटेल ने शिक्षकों से 2 अक्टूबर के कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है।मोर्चा पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षा, संगठन और संघर्ष ही परिवर्तन का मार्ग है। गांधी जयंती पर शिक्षक अहिंसात्मक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे।