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केरवा में सीमांकन से पहले अटका सर्वे: 29 अक्टूबर को एनजीटी में देनी है रिपोर्ट, एक हजार सीमा चिह्नों की जांच

Wed, 14 Oct 2026 05:57 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार



केरवा जलाशय के एफटीएल और बफर क्षेत्र का सीमांकन करने के लिए प्रस्तावित सर्वे फिर टल गया। एनजीटी ने तीन सप्ताह में ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट तस्वीरों और जमीनी सत्यापन के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। पहले 33 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे, जबकि जलाशय की सीमा पर लगाए गए 1080 खंभों और कंक्रीट ब्लॉकों की स्थिति भी जांची जाएगी। अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को है।
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केरवा डैम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केरवा जलाशय के आसपास निर्माण और अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की कवायद बार-बार टल रही है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर होने वाला ग्राउंड ट्रूथिंग और भौतिक सत्यापन ऐन वक्त पर स्थगित कर दिया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जलाशय के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और बफर क्षेत्र की अंतिम सीमा तय करने की प्रक्रिया समय पर पूरी हो पाएगी या नहीं। समिति को 29 अक्टूबर की अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट तैयार करनी है। सर्वे टलने के बाद केरवा के डूब क्षेत्र और कैचमेंट एरिया में मौजूद निर्माणों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि क्षेत्र में प्रभावशाली लोगों के फार्म हाउस और अन्य निर्माण मौजूद हैं, ऐसे में सीमांकन के नतीजों पर सबकी नजर है। हालांकि, सर्वे टलने के पीछे रसूखदारों के निर्माण बचाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी नितेश चौरसिया ने प्रशासनिक व्यस्तता और अन्य जिम्मेदारियों को स्थगन की वजह बताया है।
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तीन सप्ताह में सीमा तय करने के निर्देश
एनजीटी ने केरवा जलाशय के एफटीएल और बफर क्षेत्र का अंतिम निर्धारण करने के लिए उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड, जल संसाधन विभाग के कंटूर और टोपोग्राफिकल मैप तथा जलाशय की ऊंचाई के आधार पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और मौके पर भौतिक सत्यापन को आधार बनाया जाना है। समिति को तीन सप्ताह में प्रक्रिया पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी है। ऐसे में सर्वे में देरी से समयसीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार करने की चुनौती बढ़ गई है। अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होने के कारण निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने के लिए समिति के पास सीमित समय बचा है।

1080 सीमा चिह्नों की मौजूदगी भी जांचेगी टीम
केरवा डैम का जलमग्न क्षेत्र उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के अनुसार करीब 462.150 हेक्टेयर है। इसकी सीमा चिह्नित करने के लिए पहले 1080 कंक्रीट ब्लॉक और खंभे लगाए गए थे। अब जमीनी सत्यापन में यह भी देखा जाएगा कि इनमें से कितने सीमा चिह्न मौके पर मौजूद हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सीमा चिह्नों की वास्तविक स्थिति से जलाशय के निर्धारित क्षेत्र और मौके पर मौजूद निर्माणों के बीच स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी। ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों का मिलान सरकारी रिकॉर्ड से कर सीमांकन को अंतिम रूप देने की तैयारी है।
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पहले 33 अतिक्रमण हुए थे चिह्नित
पूर्व में हुई जांच में केरवा जलाशय क्षेत्र में 33 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। इनमें 18 सरकारी भूमि और 15 निजी भूमि से संबंधित संरचनाएं बताई गई थीं। अब नए सत्यापन में यह जांचा जाएगा कि पहले चिह्नित संरचनाएं वर्तमान में भी मौजूद हैं या नहीं और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है। इस प्रक्रिया से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि पुराने रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में कितना अंतर है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष समिति की जांच और रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे।

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प्रशासन ने बताई व्यस्तता, नई तारीख का इंतजार
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी नितेश चौरसिया के मुताबिक, कार्य की अधिकता और एनजीटी से जुड़े अन्य प्रशासनिक दायित्वों के कारण सर्वे स्थगित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे जल्दबाजी में पूरा नहीं किया जा सकता। जल्द ही नई तारीख तय कर सर्वे कराया जाएगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि समिति कब दोबारा मौके पर पहुंचती है और 29 अक्टूबर की सुनवाई से पहले एनजीटी को रिपोर्ट सौंप पाती है या नहीं। केरवा जलाशय की सीमा, पुराने अतिक्रमणों और मौजूदा निर्माणों की वास्तविक स्थिति पर तस्वीर इसी रिपोर्ट से साफ होने की उम्मीद है।
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