मनरेगा योजना का नाम बदले जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस विधायकों ने भाजपा सरकार पर गांधी विचारधारा को कमजोर करने का आरोप लगाया। विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक दल ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को रोजगार की संवैधानिक गारंटी देने वाला ऐतिहासिक कानून है, जो महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित है। ऐसे में इसका नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) करना गांधीवादी सोच और ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
जनता को असल मुद्दे से भटकने की कोशिश
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा सरकार नाम बदलने की राजनीति के जरिए जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटका रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गांधी जी के नाम से जुड़ी योजना में बजट और कामकाज पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, तो अब केवल नाम बदलने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। क्या भाजपा को बापू के नाम और विचारों से असहजता है?
मूल प्रश्नों पर जवाब देने से बच रही सरकार
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा के तहत रोजगार के दिन, समय पर मजदूरी भुगतान और सामाजिक सुरक्षा जैसे मूल प्रश्नों पर जवाब देने से बच रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार को शब्दों के बजाय ज़मीनी काम पर ध्यान देना चाहिए, ताकि ग्रामीण श्रमिकों को वास्तविक लाभ मिल सके।
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महात्मा गांधी के योगदान को लगातार कमतर आंकने की कोशिश
विरोध के दौरान कांग्रेस विधायक महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठे और नारेबाजी की। विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि भाजपा महात्मा गांधी के योगदान को लगातार कमतर आंकने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार राम जी के नाम पर कोई नई योजना लाती, तो उसका स्वागत किया जाता, लेकिन गांधी जी के नाम से जुड़ी योजना को हटाना अस्वीकार्य है।
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फैसला जनविरोधी और राजनीतिक दिखावे से प्रेरित
कांग्रेस विधायक दल ने स्पष्ट किया कि यह फैसला जनविरोधी और राजनीतिक दिखावे से प्रेरित है। पार्टी इस निर्णय का विरोध सदन से लेकर सड़क तक जारी रखेगी और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेगी। इस बीच यह भी उल्लेखनीय रहा कि 17 दिसंबर को मध्यप्रदेश विधानसभा ने अपने स्थापना के 69 वर्ष पूरे किए। इसी ऐतिहासिक दिन आयोजित एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों ने मनरेगा का नाम बदलने के निर्णय के खिलाफ विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।