क्रिकेटर शशांक सिंह ने अपने और अपने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पिता के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर सफाई देते हुए सभी आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने आरोप लगाए हैं, उसे न तो बंधक बनाया गया और न ही उसके साथ वैसा कोई व्यवहार हुआ, जैसा शिकायत में कहा गया है।
'बंधक बनाने जैसी कोई घटना नहीं हुई'
शशांक सिंह ने कहा कि जिस व्यक्ति की बात हो रही है, वह 25 तारीख की शाम को उनके घर आया था और 28 तारीख की सुबह वहां से चला गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कोई व्यक्ति तीन दिन घर में रहे और फिर चला जाए, तो उसे बंधक बनाकर रखना कैसे कहा जा सकता है।
'खुद को अच्छा रसोइया बताया था'
शशांक सिंह ने बताया कि वह व्यक्ति उनके घर आकर बोला था कि उसे खाना बनाना आता है और वह हर तरह का भोजन तैयार कर सकता है। बाद में उसने खुद ही स्वीकार किया कि उसे ठीक से खाना बनाना नहीं आता।
'ऐसे व्यक्ति पर कैसे भरोसा करें'
उन्होंने कहा कि जब कोई पहले बड़े-बड़े दावे करे और बाद में खुद ही अपनी बात से मुकर जाए, तो ऐसे व्यक्ति पर भरोसा कैसे किया जा सकता है।
'घर के बेडरूम के वीडियो बनाए'
शशांक सिंह ने आरोप लगाया कि वह व्यक्ति घर के अंदर आने के बाद बेडरूम तक पहुंच गया और वहां के वीडियो बनाने लगा। उन्होंने कहा कि बेडरूम में महंगी और कीमती चीजें रखी थीं। उस व्यक्ति ने वहां की वीडियो रिकॉर्डिंग की और उन्हें दूसरे लोगों को भी भेज दिया।
'ऐसे व्यवहार को क्या कहा जाए?'
शशांक सिंह ने कहा कि किसी के घर के निजी कमरों में जाकर वीडियो बनाना और उन्हें दूसरों को भेजना बिल्कुल गलत है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे व्यवहार को क्या कहा जाना चाहिए।
'मेरी उससे मुश्किल से डेढ़ मिनट बात हुई'
उन्होंने कहा कि उनकी उस व्यक्ति से मुश्किल से एक या डेढ़ मिनट की ही बातचीत हुई थी। उन्होंने सिर्फ इतना पूछा था कि वह कौन-कौन से व्यंजन बना सकता है। शशांक सिंह के अनुसार उस व्यक्ति ने दावा किया था कि वह दक्षिण भारतीय, चाइनीज और हर तरह का खाना बनाना जानता है। इसके अलावा उनकी उससे कोई खास बातचीत नहीं हुई।
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'पिता के दोस्त की सिफारिश पर बुलाया गया था'
शशांक सिंह ने बताया कि वह व्यक्ति उनके पिता के एक दोस्त की सिफारिश पर घर आया था। उस दोस्त ने कहा था कि वह अच्छा रसोइया है और कई तरह के व्यंजन बना सकता है। इसी भरोसे पर उसे घर बुलाया गया था।
'घर पहुंचते ही मांगे 20 हजार रुपये'
उन्होंने कहा कि घर पहुंचते ही उस व्यक्ति ने 20 हजार रुपये एडवांस की मांग कर दी। इस पर उनकी मां ने उससे कहा कि पहले दो-तीन दिन खाना बनाकर दिखाओ। अगर खाना अच्छा बना और घर के माहौल में ठीक से काम कर पाए, तो उसके बाद मेहनताना और भुगतान पर फैसला किया जाएगा।
'शुरुआत से ही एडवांस की जिद ने बढ़ाया शक'
शशांक सिंह ने कहा कि शुरुआत से ही 20 हजार रुपये एडवांस मांगना उन्हें संदिग्ध लगा। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति काम शुरू करते ही इतनी बड़ी रकम क्यों मांगेगा। पहले उसे अपना काम दिखाना चाहिए था। शशांक सिंह ने कहा कि वह व्यक्ति अच्छा खाना भी नहीं बना पाया। उन्होंने कहा कि अगर किसी का काम पसंद नहीं आएगा, तो उसे घर में कैसे रखा जा सकता है। इसी वजह से उसे आगे काम पर नहीं रखा गया।