भोपाल नगर निगम की करोड़ों की लागत से बनी नई मुख्यालय बिल्डिंग में एक महिला कर्मचारी करीब आधे घंटे तक लिफ्ट में फंसी रही। पिछले महीने ही शुरू हुए भवन में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था, रखरखाव और आपातकालीन प्रबंधन तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करोड़ों की लागत से बनी भोपाल नगर निगम की नई मुख्यालय बिल्डिंग में सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं की बड़ी खामी सामने आई है। पिछले महीने ही निगम कार्यालय को नए भवन में शिफ्ट किया गया था, लेकिन संचालन शुरू होने के कुछ ही समय बाद लिफ्ट खराब होने की घटना ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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आधे घंटे लिफ्ट में रही कैद
बुधवार को निगम की एक महिला कर्मचारी लिफ्ट में फंस गई। अचानक तकनीकी खराबी आने से लिफ्ट बीच मंजिल पर रुक गई और कर्मचारी करीब आधे घंटे तक अंदर ही कैद रही। बाद में उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के दौरान आपातकालीन सहायता व्यवस्था की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठे हैं। कर्मचारियों के अनुसार लिफ्ट बंद होने के बाद राहत और बचाव की प्रक्रिया तत्काल और प्रभावी तरीके से संचालित होती नजर नहीं आई।
अधिकारी नहीं पहुंचे
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटना के दौरान कोई वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचा। इससे कर्मचारियों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि नए मुख्यालय में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
रखरखाव पर उठे सवाल
करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए आधुनिक भवन में लिफ्ट जैसी महत्वपूर्ण सुविधा का अचानक ठप हो जाना रखरखाव और तकनीकी निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही ऐसी खामियां सामने आ रही हैं तो भविष्य में बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। घटना के बाद भवन में लगी सभी लिफ्टों और सुरक्षा उपकरणों की तकनीकी जांच कराने की मांग उठने लगी है। कर्मचारियों का मानना है कि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले सुरक्षा व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा जरूरी है।
उठ रहे ये बड़े सवाल
- नई नगर निगम बिल्डिंग की लिफ्ट आधे घंटे तक बंद क्यों रही?
- आपातकालीन स्थिति में सहायता तंत्र कितनी तेजी से सक्रिय हुआ?
- महिला कर्मचारी को बाहर निकालने में इतना समय क्यों लगा?
- क्या भवन की लिफ्टों का नियमित सुरक्षा परीक्षण किया गया है?
- करोड़ों की लागत वाली परियोजना में सुरक्षा मानकों की निगरानी कौन कर रहा है?