भोपाल में पहले जुमे पर नमाज अदा करने जुटे समाजजन
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रमजान और रोजा इंसान को सब्र, शुक्र और अपने आसपास मौजूद जरूरतमंदों की फिक्र सिखाता है। रोजा रखने के मायने सिर्फ भूखा या प्यासा रहना नहीं, बल्कि किसी जरूरमंद की भूख और प्यास की शिद्दत को महसूस करना है। समाज के कमजोर लोगों को उनके हिस्से की रकम (जकात) पहुंचाकर उन्हें जिंदगी की आसानियां भी रमजान माह मुहैया कराता है। कुरआन के नाजिल (अवतरित) होने वाले इस महीने में इबादत (नमाज) और तिलावत (कुरआन पाठ) करना ही इस महीने की सच्ची अकीदत (आस्था) है।
काजी ए शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी ने शुक्रवार को रमजान माह के पहले जुमा की नमाज अदा कराने से पहले यह बात कही। शहर की पुरानी मस्जिद मोती मस्जिद में नमाज ए जुमा का खुतबा (विशेष इस्लामी संबोधन) देने से पहले शहर काजी ने रमजान माह के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने इस्लामी धर्मावलंबियों से इस माह में खास इबादत करने के साथ भलाई के कामों की तरफ कदम बढ़ाए रखने की बात कही। शहर काजी ने कहा कि रोजे के मायने सिर्फ भूखा रहना नहीं है बल्कि कदमों और हाथों को गलत काम की तरफ बढ़ने से रोकना, जुबान को गलत कहने, आंखों को गलत देखने और कानों को गलत सुनने से रोकना भी रोजे का हिस्सा है। दिल में गलत ख्याल आने से रोककर भी रोजे की पुख्तगी की जाना चाहिए।
अकीदत के सजदों से सजा शहर
रमजान माह के पहले जुमा पर राजधानी भोपाल में कमोबेश सभी बड़ी और छोटी मस्जिदों में नमाजियों का सैलाब उमड़ा दिखाई दिया। ताजुल मसाजिद, मोती मस्जिद, जामा मस्जिद समेत प्रेस कॉम्प्लेक्स की मस्जिद रब्बानी और आरिफ नगर मस्जिद में लोगों का हुजूम दिखाई दिया। नए या साफ सफ्फाफ कपड़ों में, खुशुबू लगाए और आंखों में सुरमा सजाए लोग मस्जिदों की तरफ बढ़े। नमाज के बाद सारी दुनिया में अमन और सुकून की दुआएं की गईं। खास दुआ में अपने मुल्क हिंदुस्तान, अपने सूबे मध्य प्रदेश और अपने शहर भोपाल की तरक्की और कामयाबी की दुआ भी शामिल की गई।
अदा किए जाएंगे 4 जुमा, अलविदा जुमा होगा खास
मंगलवार से शुरू हुए रमजान माह के दौरान कुल 4 जुमा अदा किए जाएंगे। इसका पहला जुमा 15 मार्च को पढ़ा गया है। जिसके बाद 22 और 29 मार्च को भी नमाज ए जुमा अदा होगी। इसके बाद रमजान माह का आखिरी जुमा 5 अप्रैल को होगा। भोपाल में इस अलविदा जुमा को छोटी ईद के रूप मे मनाने का रिवाज है। नए कपड़े और ईद जैसी तैयारियों के साथ अकीदतमंद मस्जिदों में पहुंचते हैं, नमाज अदा करने के बाद एक दूसरे को इस खास दिन की मुबारकबाद देते हैं।
(खान आशु की रिपोर्ट)