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दो दिन पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश: 12 जिलों में आंधी का अलर्ट, 10 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में मौसम साफ

Thu, 08 Oct 2026 07:03 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

मानसून की विदाई के बाद भी पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का दौर जारी है। गुरुवार को 12 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है, जबकि 9 अक्टूबर को भी कई जिलों में पानी गिर सकता है। 10 अक्टूबर से पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में मौसम साफ होने का अनुमान है।
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मौसम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई के बाद मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पूर्वी हिस्से में सक्रिय चक्रवात और ट्रफ के असर से बारिश का दौर शुरू हो गया है। गुरुवार को जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के 12 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है। 9 अक्टूबर को भी पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में पानी गिर सकता है। इसके बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा। मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में आंधी के साथ बारिश होने का अनुमान है। पिछले 24 घंटे में भी पूर्वी हिस्से के 10 से ज्यादा जिलों में बारिश दर्ज की गई है।
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9 अक्टूबर के बाद थमेगा बारिश का दौर
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के मुताबिक 9 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर में भी बारिश हो सकती है। इसके बाद बारिश कराने वाला सिस्टम कमजोर होगा। सबसे बड़ा बदलाव 10 अक्टूबर से देखने को मिलेगा। मौसम केंद्र के सात दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार 10 से 12 अक्टूबर के बीच पूर्वी और पश्चिमी, दोनों हिस्सों में मौसम साफ रहने की संभावना है।

रबी की बोवनी में स्थानीय नमी देखना ज्यादा जरूरी
मानसून की विदाई के बाद हुई यह बारिश पूरे प्रदेश के खेतों के लिए समान असर वाली नहीं होगी। पूर्वी हिस्से में 9 अक्टूबर की स्थानीय बारिश से मिट्टी की ऊपरी परत में नमी बढ़ सकती है, लेकिन इसे पूरे प्रदेश में रबी की तैयारी के लिए पर्याप्त बारिश नहीं माना जा सकता। खासकर पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगातार शुष्क मौसम का अनुमान है। ऐसे में किसान रबी की बोवनी या सिंचाई का फैसला सिर्फ बारिश के सामान्य पूर्वानुमान के आधार पर न लें। खेत की वास्तविक नमी, पिछले दिनों हुई बारिश और सिंचाई की उपलब्धता को ध्यान में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण रहेगा।
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3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही पूरी तरह लौट चुका है। इसके बावजूद स्थानीय मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से पूर्वी हिस्से में बारिश हो रही है। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार अक्टूबर में बारिश के साथ दिन में गर्मी और रात में ठंडक का दौर सामान्य मौसमी बदलाव का हिस्सा है। इस बार प्रदेश में मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा। जून में कमजोर बारिश के कारण सीजन का कुल आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।

35.8 इंच बारिश, सामान्य से 1.5 इंच कम
जून से सितंबर तक मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश हुई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में कुल बारिश करीब 4 प्रतिशत कम रही। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत कम पानी गिरा। हालांकि पूर्वी हिस्से के भी कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा है।

25 जिलों में पूरा हुआ बारिश का कोटा
प्रदेश के 25 जिलों में सीजन की सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडोरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं। वहीं 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में कमी ज्यादा रही है। आलीराजपुर, धार, झाबुआ, रतलाम, उज्जैन, इंदौर, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल और रायसेन समेत कई जिलों में बारिश सामान्य से नीचे रही।

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जून की कमी आखिर तक पूरी नहीं हो सकी 
इस बार मानसून की शुरुआत ही कमजोर रही थी। जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से आंकड़े में सुधार हुआ, लेकिन मानसून के दौरान दो बार ब्रेक की स्थिति बनी और कई दिनों तक बारिश का दौर कमजोर रहा। सितंबर के आखिरी हिस्से में मजबूत बारिश हुई, जिससे जुलाई, अगस्त और सितंबर का कुल आंकड़ा सामान्य के आसपास या उससे ऊपर पहुंच गया। इसके बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि पूरे मानसून सीजन में मध्य प्रदेश की बारिश सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम रह गई।

 
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