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मानसून की विदाई के बाद भी पूर्वी एमपी में बारिश: नौ जिलों में आज बरसेंगे बादल, भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप

Fri, 09 Oct 2026 07:07 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

 मध्य प्रदेश से 3 अक्टूबर को मानसून लौट चुका है, लेकिन चक्रवात और ट्रफ के असर से पूर्वी हिस्से में बारिश जारी है। शुक्रवार को 9 जिलों में बारिश की संभावना है, जबकि भोपाल और इंदौर में धूप रहेगी। 11 अक्टूबर तक पूर्वी जिलों में बारिश हो सकती है और 12 अक्टूबर से मौसम साफ होने का अनुमान है।
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मौसम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। पूर्वी हिस्से में सक्रिय चक्रवात और ट्रफ के असर से बारिश का सिलसिला जारी है। पिछले 4 दिन से आंधी-बारिश झेल रहे इस क्षेत्र में अगले 3 दिन तक बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। शुक्रवार को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर में बारिश की संभावना है। इसके उलट भोपाल और इंदौर समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा और धूप निकलेगी। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, मौजूदा मौसमी परिस्थितियों का असर 11 अक्टूबर तक पूर्वी मध्य प्रदेश में दिखाई देगा। 10 और 11 अक्टूबर को भी इन इलाकों में बारिश हो सकती है। इसके बाद 12 अक्टूबर से मौसम साफ होने का अनुमान है। यानी प्रदेश के एक हिस्से में जहां बादलों और बारिश का असर बना हुआ है, वहीं दूसरे हिस्से में धूप के साथ दिन का तापमान बढ़ने की स्थिति रह सकती है।
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एक ही प्रदेश में बारिश का अलग-अलग असर
मौसम के इस बदलाव का असर खेती पर भी पड़ सकता है। पूर्वी जिलों में होने वाली बारिश से खेतों की ऊपरी मिट्टी में नमी बढ़ सकती है, लेकिन इसका लाभ पूरे प्रदेश में एक जैसा नहीं होगा। पश्चिमी मध्य प्रदेश में फिलहाल बारिश की संभावना कम रहने से किसानों को रबी फसलों की तैयारी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार करनी होगी। बोवनी और सिंचाई का फैसला लेते समय खेत में मौजूद नमी, हाल के दिनों में हुई वास्तविक बारिश और सिंचाई के उपलब्ध साधनों को ध्यान में रखना जरूरी होगा। केवल प्रदेश में बारिश की संभावना के आधार पर खेती से जुड़े फैसले लेना उचित नहीं होगा।

3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है। इसके बावजूद स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के कारण पूर्वी हिस्से में बारिश हो रही है। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, अक्टूबर में बारिश, दिन में गर्मी और रात में ठंडक का मिला-जुला असर देखने को मिलता है। इस बार भी महीने की शुरुआत में दिन के समय धूप और रात में ठंडक के साथ कुछ जिलों में बारिश दर्ज की जा रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा।
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सामान्य से 1.5 इंच कम हुई बारिश
जून से सितंबर तक चले मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस हिसाब से पूरे सीजन में करीब 1.5 इंच कम पानी गिरा और बारिश सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम रही। हालांकि, प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के आंकड़ों में अंतर है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से करीब 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में सामान्य से लगभग 12 प्रतिशत कम पानी गिरा। यही अंतर बताता है कि प्रदेश के सभी जिलों में मानसून का असर एक जैसा नहीं रहा।

जून की कमी पूरी नहीं कर सका मानसून
बारिश के कुल आंकड़े में कमी की बड़ी वजह जून में कम वर्षा होना रही। मौसम विभाग के अनुसार, जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन बाद में मानसून में दो बार ब्रेक आया और कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। मानसून के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत मौसमी सिस्टम से बारिश जरूर हुई, लेकिन शुरुआती कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश के आंकड़े बेहतर रहने के बावजूद जून की कमी का असर पूरे सीजन के अंतिम आंकड़े में दिखाई दिया।

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25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य बारिश का लक्ष्य पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं। दूसरी ओर, 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिले शामिल हैं। अलीराजपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, इंदौर, खंडवा, खरगोन क्षेत्र के आसपास के जिलों और उज्जैन संभाग के कुछ इलाकों में बारिश की कमी का असर अधिक रहा। पूर्वी हिस्से में भी रीवा, जबलपुर, सागर और शहडोल संभाग के कुछ जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। कुल मिलाकर, मानसून की विदाई के बाद भी पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां जारी हैं, लेकिन यह बारिश पूरे प्रदेश में पानी की कमी दूर करने वाली नहीं है। 12 अक्टूबर से मौसम साफ होने के अनुमान के बीच अब किसानों और आम लोगों की नजर तापमान में होने वाले बदलाव पर रहेगी।



 
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