मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश होते ही कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उमंग सिंघार ने ओबीसी मुद्दे पर सरकार को घेरा, जयवर्धन सिंह ने यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड की मांग उठाई, फूल सिंह बरैया ने यूसीसी की अवधारणा और लिव-इन प्रावधानों पर सवाल उठाए, जबकि आतिफ अकील काले कपड़ों और विरोधी तख्ती के साथ विधानसभा पहुंचे।
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 सदन में पेश कर दिया। विधेयक पेश होते ही कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, विधायक फूल सिंह बरैया और आतिफ अकील ने अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरा। वहीं विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विधेयक पर मंगलवार को चर्चा कराई जाएगी।
विज्ञापन
यूसीसी की जल्दबाजी
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए यूसीसी लागू करने की जल्दबाजी कर रही है, लेकिन ओबीसी और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर पूरी तरह खामोश है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ओबीसी समाज के मुद्दों पर चर्चा से आखिर क्यों बच रही है। सिंघार ने कहा कि कांग्रेस सदन के भीतर और बाहर सामाजिक न्याय और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी।
देश को यूसीसी नहीं, यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड चाहिए
पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि देश का युवा यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं, बल्कि यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं और भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। उनका कहना था कि सरकार को यूसीसी से पहले शिक्षा व्यवस्था को समान और मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
फूल सिंह बरैया ने उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा कि सरकार को पहले यूसीसी का मूल उद्देश्य स्पष्ट करना चाहिए। उनके मुताबिक, जब तक नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता नहीं मिलती, तब तक यूसीसी का उद्देश्य अधूरा रहेगा। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है।
काले कपड़ों में पहुंचे आतिफ अकील
कांग्रेस विधायक आतिफ अकील काले कपड़े पहनकर और काली स्कॉर्पियो से विधानसभा पहुंचे। उनके हाथ में यूसीसी विरोधी तख्ती थी, जिस पर लिखा था- बाबा साहेब के संविधान से छेड़छाड़ नहीं चलेगी और मुसलमानों को यूसीसी से बाहर किया जाए। उनके इस विरोध ने विधानसभा परिसर में राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया।