यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी व्यापारी छूट शुल्क लगाए जाने के विरोध में भोपाल के व्यापारियों ने गुरुवार को नो यूपीआई डे मनाया। किराना, चावल और दाल कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने सांकेतिक विरोध के तहत ग्राहकों से यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं किया। व्यापारियों का कहना है कि उनका मुनाफा पहले से ही बहुत कम है। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर 0.4% शुल्क लगने से कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि व्यापारियों का औसत मुनाफा करीब 1% है। इसमें से 0.4% शुल्क के रूप में चला जाएगा तो व्यापारी के पास बचने वाला मुनाफा और कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के दूसरे खर्च भी होते हैं। परिवार चलाने के साथ दुकान का किराया, कर्मचारियों का खर्च और अन्य कारोबारी खर्च उठाने पड़ते हैं। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क व्यापारियों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है।
डिजिटल भुगतान के विरोध में नहीं व्यापारी
विवेक साहू ने स्पष्ट किया कि व्यापारी डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक व्यापारियों ने यूपीआई को तेजी से अपनाया है। ग्राहकों के लिए भी भुगतान आसान हुआ और व्यापारियों के लिए नकदी रखने की परेशानी कम हुई। उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अपनाकर सरकार की डिजिटल इंडिया की पहल में सहयोग किया है। अब इसी व्यवस्था पर शुल्क लगाया जाएगा तो छोटे और मध्यम व्यापारियों पर इसका असर पड़ेगा। व्यापारियों की मांग है कि सरकार उनके मुनाफे और कारोबार की वास्तविक स्थिति को देखते हुए शुल्क लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करे।
आज सांकेतिक विरोध, 16 अक्टूबर से बड़ा फैसला
व्यापारियों ने फिलहाल 8 अक्टूबर को सांकेतिक रूप से यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला लिया है। विवेक साहू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने व्यापारियों की मांग पर विचार नहीं किया तो 16 अक्टूबर से यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी अपनी मांग सरकार तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि विरोध का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को खत्म करना नहीं, बल्कि उस पर प्रस्तावित शुल्क का विरोध करना है।
चावल-दाल व्यापारियों ने भी किया समर्थन
चावल-दाल व्यापारी संघ, हनुमानगंज-जुमेराती के अध्यक्ष महेश रामख्यानी ने कहा कि व्यापारी शांतिपूर्वक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कारोबार में पहले ही मुनाफे की गुंजाइश सीमित है। इसके बाद यदि सरकार की ओर से अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो इसका सीधा असर व्यापार की लागत और व्यापारी की कमाई पर पड़ेगा। रामख्यानी ने कहा कि व्यापारी डिजिटल भुगतान के विरोधी नहीं हैं। डिजिटल भुगतान ने कारोबार को गति देने में मदद की है। ग्राहकों को भी भुगतान की सुविधा मिली है। लेकिन शुल्क लगाए जाने से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसलिए सरकार को व्यापारियों की स्थिति को समझते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
मांग नहीं मानी तो संगठन मिलकर तय करेंगे अगली रणनीति
महेश रामख्यानी ने कहा कि यदि सरकार ने व्यापारियों की मांग नहीं मानी तो आगे की रणनीति व्यापारी संगठन, वाणिज्य मंडल और दूसरे संबंधित संगठनों से चर्चा के बाद तय की जाएगी। व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल उनका विरोध सांकेतिक है, लेकिन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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व्यापारियों की मुख्य आपत्ति क्या है
व्यापारियों के अनुसार उनका कारोबार बहुत कम मुनाफे पर चलता है। उनका कहना है कि करीब 1% मुनाफे वाले कारोबार में 0.4% शुल्क का असर मामूली नहीं है। खासकर छोटे कारोबारियों के लिए यह शुल्क अतिरिक्त लागत बन सकता है। व्यापारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क की व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाए। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाले व्यापारियों पर ही अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं होगा।