केरवा जलाशय की वास्तविक सीमा, पूर्ण जलभराव स्तर और बफर क्षेत्र को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण, भोपाल ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। 30 सितंबर को हुई सुनवाई में अधिकरण ने तीन सप्ताह के भीतर पूर्ण जलभराव स्तर और बफर क्षेत्र का अंतिम निर्धारण करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जल संसाधन विभाग के उपलब्ध रिकॉर्ड, समोच्च मानचित्र, स्थलाकृतिक मानचित्र और जलाशय की ऊंचाई को आधार बनाया जाएगा। इसके साथ ही ड्रोन सर्वे, उपग्रह तस्वीरों और जमीनी सत्यापन के जरिए मौके की वास्तविक स्थिति भी दर्ज की जाएगी।
1080 सीमा-चिह्नों की भी होगी जांच
उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक केरवा जलाशय का जलमग्न क्षेत्र करीब 462.150 हेक्टेयर है। इसकी सीमा को 1080 कंक्रीट ब्लॉक और खंभों से चिह्नित किया गया था। अब भौतिक सत्यापन के दौरान यह भी जांच होगी कि इनमें से कितने सीमा-चिह्न मौके पर मौजूद हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।
33 अतिक्रमण पहले हो चुके हैं चिन्हित
पर्यावरणविद् राशिद नूर खान ने बताया कि पूर्व जांच में केरवा जलाशय क्षेत्र में 33 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। इनमें 18 सरकारी और 15 निजी भूमि से संबंधित संरचनाएं बताई गई थीं। अब ड्रोन सर्वे और जमीनी सत्यापन से यह पता लगाया जाएगा कि पहले चिन्हित किए गए अतिक्रमणों में से कितने अभी मौके पर मौजूद हैं और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है। अधिकरण ने सर्वे और सत्यापन के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अगली सुनवाई में पेश करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में जलाशय के पूर्ण जलभराव स्तर, बफर क्षेत्र, सीमा-चिह्नों और मौके पर मौजूद निर्माणों की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
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29 अक्टूबर को अगली सुनवाई
अधिकरण ने पूरी प्रक्रिया के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। सर्वे और सत्यापन के बाद तैयार रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होगी।