मध्य प्रदेश में दो साइक्लोनिक सकुर्लेशन और एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव है। इसके असर से प्रदेश में ओलावृष्टि, बारिश, गरज-चमक और आंधी चल रही है। शुक्रवार को प्रदेश के उमरिया, शहडोल, मैहर समेत कई जिलों में बारिश के साथ ओले गिरे जिससे किसानों की फसलों का काफी नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने अगले दो दिन के लिए अलर्ट जारी किया है। 22 और 23 मार्च को भी ऐसा मौसम बना रहेगा। मौसम बदलने से कई शहरों में दिन के तापमान में खासी गिरावट हुई है। सीधी में 27.8 डिग्री, रीवा में 28.8 डिग्री, सतना में 31.4 डिग्री और नौगांव में पारा 32.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग के सीनियार वैज्ञानिक वेद प्रकाश ने बताया कि मौजूदा सिस्टम का असर 23 मार्च तक रहेगा। 24 मार्च से एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो सकता है। इसका असर भी प्रदेश में देखने को मिलेगा।
उमरिया में ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
उमरिया जिले के घुलघुली क्षेत्र के ग्राम पंचायत जरहा के घोरमारा में शुक्रवार शाम करीब 5 बजे मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी, तूफान और बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। इस प्राकृतिक आपदा से गेहूं, चना, मटर और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। फसल कटाई के अंतिम चरण में थी, ऐसे में यह आपदा किसानों के लिए और भी ज्यादा चिंताजनक हो गई है।
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ओलावृष्टि से इन फसलों को नुकसान
खेतों में खड़ी गेहूं की फसल तेज हवाओं के कारण गिर रही है। किसान अरुण तिवारी के अनुसार उनकी मेहनत से तैयार की गई फसल अब खतरे में है। जिले में रुक-रुक कर हो रही बारिश से जहां गर्मी से राहत मिली है, वहीं फसलों के लिए यह नुकसानदायक साबित हो रही है। किसान डॉक्टर बाल्मिक गौतम ने कहा कि खेतों में अभी गेहूं, चने और सरसों की फसल पककर तैयार है। इसे काटने की तैयारी कर रहे थे, इस ओलावृष्टि से इन फसलों को काफी नुकसान हो सकता है।
शहडोल जिले में शुक्रवार की तड़के ठंडी हवाएं चलने लगीं। सुबह से ही घने बादल छाए रहे। दोपहर में तेज गर्जना के साथ बारिश हुई साथ ही ओलावृष्टि हुई है। छोटे-छोटे ओलों से खेतों में फसलों को नुकसान भी पहुंचा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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मैहर में गेहूं, चना और सरसों का हुआ नुकसान
मैहर में हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। शुक्रवार दोपहर जिले के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ ओले गिरने से किसानों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने गेहूं, चना और सरसों जैसी दलहन फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खासकर अमदरा और रामनगर क्षेत्र में यह नुकसान अधिक हुआ है।
शहडोल के ब्यौहारी में 3.5 इंच पानी गिरा
मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटे के अंदर कई जिलों में बारिश हुई। इनमें शहडोल, कटनी, उमरिया, जबलपुर, सिंगरौली, अनूपपुर, सीधी, दमोह, सीधी, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, सिवनी, पन्ना, सागर, मंडला, रीवा, बैतूल, भोपाल, रायसेन, शिवपुरी, विदिशा, नर्मदापुरम, मऊगंज, निवाड़ी, टीकमगढ़, नरसिंहपुर, छतरपुर, अशोकनगर, राजगढ़, बालाघाट आदि जिले शामिल हैं।
मौसम विभाग द्वारा किसानों को दी गई सलाह
1 19 मार्च, 2025 से होने वाली वर्षा की गतिविधियों को देखते हुए किसान खेतों में चल रही कटाई गतिविधियों को 3 दिनों के भीतर पूरा कर लें एवं कटाई की गई फसलों को सुरक्षित रूप से संग्रहीत करें।
2- यदि अभी तक खेत में खड़ी फसलों की कटाई की गतिविधियाँ शुरू नहीं हुई हैं तो उसे एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दें।
3- फसल के फूलने और बीज बनने के चरणों में ओलावृष्टि के कारण नुकसान हो सकता है (गेहूं, चना, सरसों)। जहां तक संभव हो, फसल की कटाई को तेज करें और फसलों की सुरक्षा के लिए जाली या तार की बाड़ लगाएं, साथ ही खेत की जल निकासी को बेहतर बनाएं और मिट्टी को स्थिर करने के लिए मल्च का उपयोग करें।
4-फलदार फसलों (आम, पपीता, केला) में ओलावृष्टि और तेज हवाओं से फूल और छोटे फल गिर सकते हैं, साथ ही शाखाओं और पत्तियों को भी नुकसान हो सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
5-ओलावृष्टि के प्रभाव से बचाने के लिए प्लास्टिक शीट्स या कृषि-जाल का उपयोग करें। पशुओं को सुरक्षित स्थान पर बांधें और उन्हें कवर किए गए शेड में रखें ।
अगले 2 दिन ऐसा रहेगा मौसम
22 मार्च: कटनी, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट में आंधी और ओले का ऑरेंज अलर्ट है। रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर में गरज-चमक और आंधी चल सकती है।
23 मार्च: शहडोल, अनूपपुर और बालाघाट में गरज-चमक और हल्की बारिश होने का अनुमान है।