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एमपी: जहां-जहां पड़े कान्हा के चरण,वहां बनेगा श्रीकृष्ण तीर्थ; सीएम मोहन यादव बोले-मध्यप्रदेश से रहा गहरा नाता

Wed, 02 Sep 2026 11:22 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं, उन स्थानों को श्रीकृष्ण तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने बुधवार को रविंद्र भवन में रासलीला समारोह में शामिल होकर राधा-कृष्ण की आरती उतारी।
 
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का मध्यप्रदेश से गहरा संबंध रहा है। वे यहां आए, शिक्षा प्राप्त की और कान्हा से योगीराज श्रीकृष्ण बनने की यात्रा पूरी की। प्रदेश में जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं, उन स्थानों को चिन्हित कर श्रीकृष्ण तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री बुधवार शाम रविंद्र भवन में आयोजित सात दिवसीय रासलीला समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन संघर्षों से भरा रहा। जन्म से ही संकटों का सामना करने वाले कृष्ण ने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी और आगे चलकर दुनिया को श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि कृष्ण का जीवन संघर्ष के बीच अपने कर्म और कर्तव्य को निभाने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने राधा-कृष्ण की जीवित झांकी की आरती उतारी और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञाता थे। उनका जीवन आज भी समाज को कर्म, ज्ञान और भक्ति का संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे 3 सितंबर को द्वारका जाएंगे। 
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गोवर्धन लीला ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
रासलीला समारोह की पांचवीं शाम ब्रज से आए कलाकारों ने गोवर्धन लीला और रास की भूमिका का मंचन किया। ब्रज भाषा में हुए इस प्रदर्शन में दिखाया गया कि किस तरह बालकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र पूजा के बजाय गोवर्धन पर्वत, गौवंश और प्रकृति के प्रति कृतज्ञ होने का संदेश दिया। इंद्र के क्रोधित होकर भारी बारिश करने पर कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। इस प्रसंग के जरिए अहंकार पर विनम्रता और संकट के समय विश्वास का संदेश दिया गया। इसके बाद कृष्ण की बांसुरी और गोपियों के प्रेम पर आधारित रास की भूमिका प्रस्तुत की गई। समारोह में इसे भक्ति और जीवात्मा-परमात्मा के आध्यात्मिक संबंध के प्रतीक के रूप में दिखाया गया। 
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भक्ति गीतों से कृष्णमय हुआ माहौल
कार्यक्रम के दूसरे हिस्से में जबलपुर की रूपाली कुसुमकर और साथियों ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। ‘श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी’, ‘एक राधा एक मीरा’, ‘श्याम तेरी बंसी’ और ‘मुकुट सिर मोर का’ जैसे गीतों पर दर्शक भक्ति में डूबे नजर आए। कार्यक्रम में शिव और राम भक्ति के गीत भी प्रस्तुत किए गए।
 
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