बुधवार को हुई मुठभेड़ में ढेर चार कट्टर महिला नक्सलियों पर 62 लाख का इनाम घोषित था। मध्य प्रदेश पुलिस को इनका सफाया कर नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। 30 वर्षों के बाद एक ही मुठभेड़ में 4 खूंखार महिला नक्सलियों को ढेर किया गया। यह मुठभेड़ बुधवार को बालाघाट जिले के सूपखार जंगल में हुई थी। जहां माओवादियों ने सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। जवाबी कार्रवाई में चार महिला माओवादी मारी गईं। मध्यप्रदेश पुलिस की आक्रामक रणनीति और हालिया मुठभेड़ों की सफलताओं से उत्साहित होकर इस बार सुरक्षा बलों ने सूपखार जंगल में माओवादियों के खिलाफ एक सर्चिंग अभियान चलाया। जानकारी मिलने पर सुरक्षा बलों ने इलाके में माओवादियों की तलाश शुरू की, तभी माओवादियों ने हमला कर दिया। सुरक्षा बलों द्वारा सटीक जवाबी फायरिंग के चलते चार महिला नक्सली मारे गए। इनके पास हथियार और अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की गई।
1996 में मारे थे चार माओवादी
बुधवार की मुठभेड़ खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह घटना 30 साल पहले 1996 में बालाघाट के धीरी-मुरुम जंगल में हुई एक बड़ी मुठभेड़ की याद दिलाती है। उसमें चार माओवादी मारे गए थे।
ये चार महिला नक्सली मारे गए
- आशा, निवासी- दक्षिण बस्तर जिला सुकमा, छत्तीसगढ़, धारित हथियार - इंसास राइफल।
- रंजीता उर्फ रमली अलमी, निवासी- ग्राम तुमरीवाल, ब्लॉक कुशम, तहसील मरदापाल, जिला कोंडागांव, छत्तीसगढ़, धारित हथियार - एसएलआर राइफल।
- सरिता उर्फ शीला उर्फ पदम, निवासी- ग्राम पेन्टा, थाना जगरकुगुंडा, जिला सुकमा, छत्तीसगढ़, धारित हथियार - 303 राइफल।
- लख्खे मरावी, निवासी- जिला सुकमा, छत्तीसगढ़, धारित हथियार - 315 राइफल।