राजधानी भोपाल के राम भक्त अचल सिंह 30 साल से अपाहिज हैं। 1992 में अयोध्या में कार सेवा के दौरान ढांचा ढहाते समय उनके ऊपर गुंबद का मलबा गिर गया था। अब अगले माह वहां भव्य मंदिर बनकर भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है तो अचल सिंह की इच्छा है कि उनको भी देश के आराध्य राम लला के दर्शन करने को मिल जाएं। 1992 में कार सेवा करने भोपाल से अचल सिंह भी गए थे। वे गुंबद को गिराने के लिए उस पर चढ़ने वाले लोगों में शामिल थे। विवादित ढांचा ढहने के साथ ही वे नीचे गिर गए थे, जिससे मलबे में दब गए थे। उनको सिर और कमर में गंभीर चोटें आई थीं।
लखनऊ अस्पताल में 13 दिन बेहोश रहे
अचल सिंह ने बताया कि वे लखनऊ के अस्पताल में 12 से 13 दिन तक बेहोश रहे। जब होश आया तो पुलिस हिरासत में थे। अब अचल सिंह का कहना है कि वे बहुत खुश हैं। बीते 30 साल से वे घर पर ही राम नाम का जाप करते हैं। उनका कहना है कि यदि राज्य सरकार उनके अयोध्या आने जाने की व्यवस्था कर दे तो वे भी भगवान राम लला के दर्शन करने जाना चाहते हैं। अचल सिंह भोपाल में सुआखेड़ी गांव में परिवार के साथ रहते हैं। उनसे अमर उजाला ने बातचीत की, पेश हैं प्रमुख अंश :
सवाल- राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम है। आपकी क्या इच्छा है?
अचल सिंह- मैं बहुत खुश हूं। मेरे सामने भगवान की प्राण प्रतिष्ठा हो रही हैं। 30 साल से मेरा शरीर खराब है। मैं एक जगह ही बैठ कर राम का नाम जपता हूं। मेरे आने-जाने की व्यवस्था हो जाए तो मैं भी भगवान के दर्शन करना चाहता हूं।
सवाल- इन 30 सालों में आपके मिलने कोई नेता आया? किसी ने कोई मदद की?
अचल सिंह- मुझे सभी जानते हैं, लेकिन कोई मिलने नहीं आया। अब मेरा बोलना भी गलत है। मैं किसी के बारे में कुछ नहीं बोलना चाहता। अब मंदिर बन गया मैं उसी में खुश हूं।
सवाल- आपके ऊपर केस दर्ज हुआ था?
अचल सिंह- उस समय मेरे ऊपर लूट-डकैत का केस लगाया था। दो वारंट आए थे। उस समय मेरा शरीर हिल भी नहीं पाता था। पुलिस वाले लिखकर ले गए कि चलने में असमर्थ हैं। फिर कोई नहीं आया।
सवाल- आपके साथ हादसा कैसे हुआ?
अचल सिंह- मैं पांच दिसंबर को मध्य प्रदेश के कारसेवकों के साथ अयोध्या पहुंचा। वहां हम कुछ लोग अगले दिन यानी 6 दिसंबर को पीछे से विवादित ढांचे, जिसे बाबरी मस्जिद कहा जाता था, पर चढ़ गए थे। तभी तेज आवाज आई कि ढांचे से नीचे उतरो। कुछ देर में ढांचा समेत हम लोग नीचे गिर गए। मेरे ऊपर ढांचे का मलबा गिर गया। जिससे मेरे सिर और कमर के नीचे गंभीर चोट आई। मैं लखनऊ के अस्पताल में भर्ती रहा। 16 दिसंबर को मुझे होश आया तो मैं पुलिस कस्टडी में था।
सवाल- आप कार सेवा के समय क्या करते थे? अभी कैसे गुजारा होता है।
अचल सिंह- मैं उस समय दूध का धंधा करता था। गांव में थोड़ी जमीन है। परिवार उस पर खेती कर अपनी गुजर बसर करता हैं।