मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट भी कहा जाता है।
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बाघों का शिकार और वनों में अतिक्रमण बड़ी चुनौती : दुबे
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे का कहना है कि बाघों सर्वाधिक बाघों की संख्या मध्य प्रदेश हैं, लेकिन सबसे ज्यादा शिकार बाघों का मध्य प्रदेश में हाे रहा है। वनों में अतिक्रमण बढ़ रहा हैं। चीतें हमारे यहां पर है, लेकिन इनको खुले जंगल में रखना अभी भी चुनौती बना हुआ हैं। जंगली हाथियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं। मानव और वन्यप्राणियों का संघर्ष रोकना आज की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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मानव और बाघों के टकराव के लिए कदम उठा रहे : सेन
मध्य प्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन शुभरंजन सेन ने कहा कि बाघों की बढ़ती संख्या से जंगलों में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है। पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना के कोर एरिया में टाइगर एरिया से बाघ की जनसंख्या बढ़ने की बहुत ज्यादा संभावना नहीं है, लेकिन अब संजय, नौरादेही और सतपुड़ा में भी बाघों की संख्या बढ़ने की पूरी संभावना है। प्रदेश में नेशनल पार्क, टाइगर रिजर्व एरिया के अलावा भी अच्छे जंगल है, जहां बाघ बड़ी संख्या में रहते हैं। प्रदेश के करीब एक तिहाई बाघ टाइगर रिजर्व के बाहर थे। सेन ने कहा कि भोपाल के आसपास पांच से सात वर्षों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन जोखिम भी नहीं लिया जा सकता। बाघों और मानव के टकराव को रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए हम सक्रिय प्रबंधन कर रहे हैं। जहां जरूरत है वहां बाड़बंदी की जा रही हैं। 10,000 चीतलों का स्थानांतरण किया है।