प्रदेश के वित्त विभाग ने निर्माण और वन विभाग के अफसरों को 30 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान के मामलों में गाइडलाइन के सख्ती से पालन के निर्देश जारी किए हैं। विभागों को छह माह पहले जारी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही भुगतान के प्रस्ताव भेजने को कहा गया है। खासतौर से केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए सिंगल नोडल एजेंसी (एसएनए) के नाम पर खोले गए बैंक खाते की कॉपी भेजना अनिवार्य किया गया है। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए निर्धारित निर्माण कार्यों और वन विभाग के विभिन्न बिलों का भुगतान सिर्फ वित्त विभाग की अनुमति से ही किया जाएगा। सभी विभागों को यह निर्देश दिया गया है कि वे भुगतान प्रस्ताव तैयार करते समय गाइडलाइन का पालन करें, ताकि वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित हो सके। वित्त विभाग ने साफ किया है कि गाइडलाइन का पालन न करने पर संबंधित विभागों के भुगतान प्रस्तावों को अस्वीकार किया जा सकता है, जिससे परियोजनाओं और योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
प्रस्ताव में इन बातों का रखना होगा ध्यान
विभागीय भुगतान प्रस्ताव में बजट आवंटन और तिमाही समय सीमा का पालन आवश्यक है। इसके साथ ही प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के आदेश की कॉपी और आहरण और संवितरण अधिकारी (डीडीओ) का नाम और कोषालय की जानकारी जहां से राशि निकाली जाएगी, बजट प्रावधान का सर्टिफिकेट, जो यह सुनिश्चित करेगा कि आवंटित राशि शेष है, को पेश करना होगा।
बैंक खातों में जमा नहीं की जाएगी निकाली गई राशि
विभाग ने यह भी निर्देशित किया है कि अफसर यह सुनिश्चित करें कि निकाली गई राशि बैंक खातों में जमा नहीं की जाएगी, सिवाय केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के। इन योजनाओं की राशि सिंगल नोडल एजेंसी (एसएनए) के खाते में ही रखी जाएगी। इसके अलावा, योजना के तहत बैंक खाते की पासबुक की कॉपी भी वित्त विभाग को भेजना आवश्यक होगा।