भोपाल के एक किसान के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच में सामने आया कि 'मेसर्स ट्राईडेंट मल्टीवेंचर्स' नामक फर्म के संचालकों ने भोपाल के रातीबड़ निवासी किसान चिंता सिंह मारण से उनकी 12.46 एकड़ कृषि भूमि धोखाधड़ी पूर्वक कम कीमत पर रजिस्ट्री करवाई और फर्जी बैंक खाता खोलकर लगभग 2.02 करोड़ रुपये की राशि हड़प ली। इस संगठित साजिश में मुख्य आरोपी राजेश शर्मा, उनकी पत्नी राधिका शर्मा, सहयोगी राजेश तिवारी और फर्म प्रतिनिधि दीपक तुलसानी शामिल हैं। मामले में भादंवि की धारा 420, 467, 468, 471, 120B एवं आईटी एक्ट की धारा 66C, 66डी के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
कैसे हुई धोखाधड़ी
शिकायतकर्ता चिंता सिंह मारण की कृषि भूमि (खसरा नंबर 01, रकबा 12.46 एकड़, ग्राम महुआखेड़ा, भोपाल) उच्च न्यायालय के आदेश से नामांतरण उपरांत उनके नाम दर्ज हुई थी। राजेश शर्मा (पता: बी-11, कस्तूरबा नगर, भोपाल) एवं उनकी पार्टनरशिप फर्म 'मेसर्स ट्राईडेंट मल्टीवेंचर्स' ने धोखाधड़ी से न केवल शिकायतकर्ता से विक्रय पत्र पर हस्ताक्षर कराए, बल्कि विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) में उल्लेखित भुगतान की राशि भी विक्रेता के खाते से धोखा देकर वापस निकाल ली। आरोपी राजेश शर्मा ने स्वयं को प्रभावशाली बताकर नामांतरण संबंधी समस्याएं सुलझाने और भूमि खरीदने का झांसा दिया। आरोपियों ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया को अपने घर पर 'ऑन साइट' तरीके से संपन्न करवाया।
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2.86 का भुगतान, लेकिन पीड़ित को मिले सिर्फ 81 लाख
शिकायतकर्ता चिंता सिंह मारण की कृषि भूमि की रजिस्ट्री के समय, आरोपी राजेश शर्मा ने शिकायतकर्ता को यह कहकर बहकाया कि 'बैंक ऑफ इंडिया' के खाते में तकनीकी दिक्कत के कारण पूरी रकम ट्रांसफर नहीं हो सकती, अतः नया खाता आईसीआईसीआई बैंक में खुलवाना आवश्यक है। इस बहाने से राजेश शर्मा ने आईसीआईसीआई बैंक, नेहरू नगर शाखा, भोपाल के कर्मचारियों को अपने घर बुलवाया। वहां शिकायतकर्ता से अंगूठे के निशान व हस्ताक्षर फॉर्म पर लिए गए, लेकिन स्वयं के मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी शिकायतकर्ता की जानकारी के बिना भर दिए। इस खाते में शिकायतकर्ता की जानकारी के बिना मोबाइल नंबर दर्ज कराया गया, जो वास्तव में राजेश शर्मा के सहयोगी राजेश कुमार तिवारी का था। इस फर्जी खाते में 2.86 करोड़ रुपये का भुगतान दिखाया गया, लेकिन शिकायतकर्ता को केवल 81 लाख रुपये के करीब ही राशि प्राप्त हुई। खाता पूर्णतः आरोपियों की देखरेख में रहा और उसमें जमा की गई राशि तुरंत राजेश तिवारी के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इस प्रकार राजेश शर्मा और उसके सहयोगियों द्वारा सुनियोजित षड्यंत्रपूर्वक शिकायतकर्ता की बहुमूल्य भूमि हड़पने के उद्देश्य से फर्जी विक्रय पत्र, कूटरचित भुगतान विवरण,अनाधिकृत बैंक ट्रांजेक्शन, किया गया, जिससे शिकायतकर्ता को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
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फर्जी खाता बना धोखाधड़ी का जरिया
आईसीआईसीआई खाते (क्र.72570738) में आरोपियों ने खुद का मोबाइल नंबर (982657) और ईमेल आईडी दर्ज कर ओटीपी और बैंकिंग कंट्रोल अपने पास रखा। बड़ी रकम जैसे 30 लाख रुपए, 40 लाख रुपए, 35 लाख रुपए इस खाते में ट्राईडेंट फर्म द्वारा ट्रांसफर की गई और तुरंत राजेश तिवारी के आईडीएफसी बैंक खाते (क्र.10098257) में भेज दी गई। जांच में सामने आया कि इस लेन-देन में ओटीपी, नेट बैंकिंग और पासवर्ड का दुरुपयोग कर पूरी रकम फर्जी तरीके से निकाली गई। तीन चेक (22 लाख प्रत्येक) दिए गए, लेकिन उन्हें 'स्टॉप पेमेंट' कर वापस ले लिए गए। इईओडब्ल्यू द्वारा की गई जांच में पाया गया कि विक्रय पत्र में 2.86 करोड़ रुपये का भुगतान दर्शाया गया था, परंतु लगभग 2.02 करोड़ रुपये की राशि शिकायतकर्ता को कभी प्राप्त ही नहीं हुई। यह राशि धोखाधड़ी से निकाली गई और आरोपियों ने जालसाजी कर भूमि का अधिग्रहण किया।