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MP News: पचमढ़ी की वादियों में अंग्रेजों के लिए 'काल' थे राजा भभूत सिंह, मोहन सरकार वहीं कर रही कैबिनेट मीटिंग

Mon, 02 Jun 2025 05:45 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश

सार

राजा भभूत सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम में सतपुड़ा की वादियों से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष की मशाल जलाई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 3 जून को पचमढ़ी में होने वाली विशेष कैबिनेट बैठक में उनके शौर्य और योगदान को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
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राजा भभूत सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 3 जून को पचमढ़ी में होने वाली विशेष कैबिनेट बैठक में राजा भभूत सिंह के शौर्य और बलिदान को याद किया जाएगा। उनकी स्मृति में प्रतिमा स्थापना और संस्थान के नामकरण जैसे प्रस्तावों पर विचार संभव है। विरासत से विकास और अपने जनजातीय नायकों को सम्मान देने के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य शासन के सूत्र वाक्य के तहत बैठक हो रही है। हर्राकोट के जागीरदार भभूत सिंह का जनजातीय समाज पर बहुत अधिक प्रभाव था। उन्होनें जनजातीय समाज को स्वतंत्रता आंदोलान के लिए तैयार किया।
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सतपुड़ा की गोद में जली थी आजादी की मशाल
राजा भभूत सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्वतंत्रता की अलख जगाई। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए जनजातीय समाज को संगठित किया और अंग्रेजों के खिलाफ संगठित संघर्ष किया।

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 तात्या टोपे के साथ कंधे से कंधा
1857 की क्रांति के दौरान राजा भभूत सिंह ने तात्या टोपे के साथ मिलकर नर्मदा के किनारे स्वतंत्रता आंदोलन की रणनीति बनाई। अक्टूबर 1858 के अंत में दोनों ने सांडिया के पास नर्मदा नदी पार की और आठ दिन तक पचमढ़ी की पहाड़ियों में मिलकर आगे की रणनीति पर काम किया।

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शिवाजी जैसी गुरिल्ला रणनीति
भभूत सिंह पहाड़ियों के रास्तों के चप्पे-चप्पे से परिचित थे। उन्होंने शिवाजी की तरह गुरिल्ला युद्ध नीति अपनाई और अंग्रेजों की फौज पर अचानक हमले कर उन्हें भ्रमित करते और अचानक गायब हो जाते। अंग्रेजों की सेना उनके खिलाफ मद्रास इन्फेंट्री तक बुलाने को मजबूर हो गई थी।
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देनवा घाटी में अंग्रेजों को हार
देनवा घाटी में हुए युद्ध में राजा भभूत सिंह की सेना ने अंग्रेजी मिलिट्री को करारी शिकस्त दी। वे 1860 तक लगातार ब्रिटिश सेना से टकराते रहे और स्थानीय जनसमुदाय के लिए प्रेरणा बने रहे।

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जनजातीय समाज के नायक
हर्राकोट के जागीरदार राजा भभूत सिंह का जनजातीय समाज में गहरा प्रभाव था। उन्होंने जनजातीय लोगों को न केवल संगठित किया बल्कि उन्हें अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खड़ा कर, स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बनाया।
 
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