राज्य सरकार ने अब बिजली की अति उच्च दाब ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के दौरान निजी भूमि लेने पर किसानों व भू-स्वामियों को पहले से कहीं अधिक मुआवजा देने का फैसला किया है। टावर के लिए उपयोग की गई जमीन पर 200% और ट्रांसमिशन लाइन के मार्गाधिकार क्षेत्र पर 30% तक क्षतिपूर्ति सीधे डिजिटल भुगतान के माध्यम से दी जाएगी।
राज्य सरकार ने बिजली की अति उच्च दाब ट्रांसमिशन लाइन (66 केवी या उससे अधिक क्षमता) बिछाने के दौरान निजी भूमि उपयोग पर दी जाने वाली क्षतिपूर्ति राशि में बड़ा बदलाव किया है। अब टावर लगाने के लिए उपयोग की गई भूमि के बदले उस भूमि के बाजार मूल्य का 200 प्रतिशत मुआवजा भूमि स्वामी को दिया जाएगा। यह राशि पहले से मिल रही क्षतिपूर्ति के अतिरिक्त होगी। टावर के चारों लेग (पिलर) के बीच की भूमि के साथ हर दिशा में 1–1 मीटर अतिरिक्त भूमि को भी क्षतिपूर्ति के लिए गिना जाएगा। क्षतिपूर्ति राशि जिला कलेक्टर निर्धारित करेंगे। इसके अलावा, ट्रांसमिशन लाइन के मार्गाधिकार (ROW) यानी टॉवर के दोनों ओर लाइन के नीचे आने वाली जमीन के लिए उस क्षेत्रफल के बाजार मूल्य (कलेक्टर गाइडलाइन) का 30% क्षतिपूर्ति दी जाएगी। बिजली ट्रांसमिशन लाइन के मार्गाधिकार (ROW) क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण कार्य करना प्रतिबंधित रहेगा। विशेष परिस्थितियों में यदि निर्माण आवश्यक हो तो विद्युत निरीक्षक विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
भुगतान डिजिटल माध्यम से
क्षतिपूर्ति राशि डिजिटल माध्यम से एक बार में ही दी जाएगी। मुआवजा मिलने के बाद भी भूमि का स्वामित्व उसी व्यक्ति के नाम पर बना रहेगा, केवल भूमि रिकॉर्ड में कैफियत कॉलम में टॉवर और लाइन का उल्लेख दर्ज किया जाएगा।
कहां लागू होगा नया नियम
ये निर्देश केवल ट्रांसमिशन लाइन पर लागू होंगे। इनके अंतर्गत उप-पारेषण (सब-ट्रांसमिशन) और वितरण लाइनें शामिल नहीं होंगी। नए मुआवजा नियम 14 नवंबर 2025 से लागू हो गए हैं।