सीएम की उपस्थिति में कुवैत की ज़बेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी के साथ सरकार ने किया समझौता
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मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में कुवैत की अग्रणी मत्स्य कंपनी जबेदी अल कुवैत फिशरीज और इंदौर की कामदार्स केयर के बीच 7,430 करोड़ रुपये के निवेश और बाय-बैक समझौते (एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 के तहत हुआ है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश से करीब 6 हजार करोड़ रुपये का मत्स्य निर्यात करना है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और मछुआरा समुदाय की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। कृषि के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन को भी आय का मजबूत स्रोत बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में तालाबों और बड़े जलाशयों की भरपूर उपलब्धता है, जिससे मत्स्य उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
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केज कल्चर से 4 लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य
उन्होंने कहा कि कुवैत के साथ हुआ यह समझौता प्रदेश के मत्स्य उद्योग को नई पहचान देगा। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश के मछुआरों को भी सीधा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशी निवेश को धरातल पर उतारने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है और अब इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। समझौते के तहत इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना जलाशयों में आधुनिक मत्स्य उत्पादन के लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जाएगी। यहां केज कल्चर तकनीक के माध्यम से करीब 4 लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही एक्वापोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स और ग्रीन हाउस तकनीक के जरिए करीब 1.23 लाख टन सब्जियों का उत्पादन भी किया जाएगा।
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35 हजार प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की संभावना
इस परियोजना से प्रदेश में 15 हजार प्रत्यक्ष और 20 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख मत्स्य निवेश और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कुवैत की जबेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी का 10 से अधिक देशों में खाद्य उत्पादों का कारोबार है, जबकि कामदार्स केयर किसान उत्पादक संगठनों के साथ काम करने वाला एक प्रमुख संगठन है।