पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद गिरी उर्फ 'मिर्ची बाबा' ने तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है। इस पत्र में मिर्ची बाबा ने संत परमानंद गिरी और उनके शिष्य ज्योतिर्मयानंद गिरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें साधुओं की संदिग्ध मौत, धार्मिक संस्थाओं पर कब्जा, बालिकाओं की रहस्यमयी मृत्यु और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग जैसे आरोप शामिल हैं।
पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद गिरी उर्फ 'मिर्ची बाबा' ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है। उन्होंने संत परमानंद गिरी और उनके अनुयायी ज्योतिर्मयानंद गिरी पर सनातन संत परंपरा को कलंकित करने वाले गंभीर आरोप लगाए। साथ ही धार्मिक संस्थानों, संत समाज और जनकल्याण योजनाओं के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में सीबीआई और एसआईटी की जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
अपने पत्र में मिर्ची बाबा ने दावा किया कि संतों द्वारा संन्यास धर्म की मर्यादा को भंग करते हुए पारिवारिक उत्तराधिकार को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वे धार्मिक प्रतिष्ठानों की आड़ में संगठित आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। इसमें साधुओं की संदिग्ध मौतें, कमजोर वर्गों के बच्चों और बालिकाओं की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौतें, तांत्रिक गतिविधियों द्वारा विरोधियों को डराने-हटाने की कोशिशें और सरकारी अनुदानों में गड़बड़ियां शामिल हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उज्जैन के चारधाम मंदिर स्थित अखंड आश्रम पर कथित रूप से गुंडागर्दी के जरिए कब्जा कर लिया गया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के उरई जिले में एक अन्य आश्रम और हरिद्वार में बालानंद गिरी की हत्या के पीछे भी इन्हीं का हाथ होने की बात लिखी गई है। दिल्ली के दिलशाद गार्डन में अनूभूतानंद महाराज और चित्रकूट में जगत त्यागी प्रकाश की रहस्यमय मौतें में ज्योतिर्मयानंद गिरी की संलिप्तता का आरोप लगाया है।
मिर्ची बाबा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे मामले की जांच या तो सीबीआई से कराए या फिर एक स्वतंत्र एसआईटी गठित कर निष्पक्ष जांच की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई गई तो यह पूरे संत समाज की प्रतिष्ठा और आमजन की धार्मिक आस्था को गहरा आघात पहुंचा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने अखाड़ा परिषद और अन्य धर्मगुरु संगठनों से अपील की है कि वे विवादास्पद साधुओं को धार्मिक पदों से तुरंत हटाएं।