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MP News: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बोले- प्रदेश के शहरों को 2047 तक स्मार्ट और हरित बनाने का काम तेज

Thu, 18 Dec 2025 08:16 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश के नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के सभी शहरों को 2047 तक स्मार्ट, पर्यावरण-अनुकूल और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। भोपाल और इंदौर के बाद जबलपुर और ग्वालियर में भी मेट्रोपॉलिटिन एरिया विकसित किए जाएंगे।
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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पिछले दो वर्षा में किए गए कामों का ब्यौरा देते हुए बताया कि केंद्र सरकार अब शहरी विकास पर ज्यादा ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि 2047 तक देश की आधी से ज्यादा आबादी शहरों में होगी, इसलिए उसी हिसाब से योजनाएं बनाई जा रही हैं। इंदौर जैसे शहरों के लिए तो 25 साल आगे की प्लानिंग की जा रही है, जिसमें जनसंख्या, गाड़ियों की संख्या और दूसरी जरूरी बातों का ध्यान रखा जा रहा है। मंत्री ने यह भी बताया कि पूरे प्रदेश के शहरों को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि वे आर्थिक विकास के केंद्र बनें और पर्यावरण के अनुकूल बनें।
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विजयवर्गीय ने बताया कि पूरे प्रदेश में शहरों को भविष्य के हिसाब से तैयार करने की योजना है। सभी शहरों को आर्थिक विकास का हब बनाया जाएगा। साथ ही, शहरों को पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। इस दिशा में, पूरे प्रदेश में 51 लाख पेड़ लगाए गए हैं। एक ही जगह पर 12 लाख पेड़ लगाकर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया गया है। अब एक बार फिर 12 लाख 40 हजार पेड़ लगाने की तैयारी है। पेड़ों की ग्रोथ की जांच के लिए 25 लोगों की टीम बनाई गई है, जिन्हें अलग-अलग सेक्टर दिए गए हैं। इसके लिए नर्सरी भी लगाई गई है। अगर कोई पेड़ खराब होता है, तो उसकी जगह दूसरा पेड़ लगा दिया जाता है।

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जबलपुर और ग्वालियर भी बनेंगे मेट्रोपॉलिटिन एरिया
उन्होंने आगे बताया कि भोपाल और इंदौर के बाद जबलपुर और ग्वालियर को मेट्रोपॉलिटिन एरिया बनाया जाएगा। इसके लिए पूरे क्षेत्र का सीमांकन किया जाएगा। सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में उन्होंने कहा कि वर्ल्ड क्लास सड़कों का 80% काम पूरा हो चुका है और 20% बाकी है। इंटीग्रेटेड टाउनशिप की योजनाएं भी शुरू की गई हैं, जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ सर्विस और मार्केट पॉलिसी भी शामिल है। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (यानी, सार्वजनिक परिवहन के आसपास विकास) और एफ.आर.सी. (FRC) को बढ़ावा दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि शहरी इलाकों को विकास के क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर काम चल रहा है। शहरों को मध्य भारत का 'आइकन' बनाने का लक्ष्य है। सिंहस्थ के लिए 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने की संभावना है, जिसमें से अभी ढाई हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

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अभी 70% नगरीय निकाय सरकार पर निर्भर 
उन्होंने यह भी कहा कि नगर पालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है। अभी 70% नगरीय निकाय भोपाल पर निर्भर हैं। नगर निगम पालिकाओं की प्रॉपर्टी को जी.आई.सी. (GIC) में डाला जाएगा। बिजली के बिल का खर्च कम करने के लिए सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। सभी नगर पालिकाओं से कहा गया है कि वे अपने खुद के बिजली प्लांट लगाएं। नई फायर पॉलिसी तैयार हो गई है। चार साल में ई.वी. (EV) वाहन होंगे। अब फायर एक्ट बनाया जा रहा है। आग से बचाव के लिए एक अलग से विभाग बनेगा। पुलिस की जगह फायर सेफ्टी विभाग इन मामलों को देखेगा। शहरी सुधार कार्यों के लिए भारत सरकार से 1926 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
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ननि और पंचायत का गंदा पानी नर्मदा में नहीं मिलेगा 
भोपाल में एक नई आईटी सिटी बन रही है। 'नमामि नर्मदे' योजना के तहत, किसी भी नगर निगम या पंचायत का गंदा पानी नर्मदा नदी में नहीं मिलेगा। जबलपुर में एसटीपी (STP - Sewage Treatment Plant) चालू हो गए हैं। मंत्री ने बताया कि भोपाल और इंदौर का मास्टर प्लान तैयार है। इस संबंध में मुख्यमंत्री के साथ बैठक हुई है। ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए आई.आई.एम. (IIM) नागपुर के साथ एम.ओ.यू. (MoU - Memorandum of Understanding) किया गया है। इंदौर और भोपाल में ट्रैफिक की प्लानिंग की जाएगी। राज्य परिवहन निगम की 600 बसें शहरी इलाकों में ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों को लाएंगी। ये बसें शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में चलेंगी।

इंजीनियरों की कमी
काम को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि उनके पास इंजीनियरों की कमी है। उन्होंने बताया कि भरोसा दिलाया कि जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा।

 
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