मंजर भोपाली की शायरी विपरीत परिस्थितियों में भी जिंदगी जीने का हौसला देती है। उनकी शायरी एक आईने की तरह है। बैरिस्टर असद उद्दीन ओवैसी ने यह बात कही। वे हैदराबाद में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह और अंतरराष्ट्रीय मुशायरे के दौरान संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली की नई पुस्तक एतबार अदब का विमोचन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पत्रकार सरदार सलीम ने कहा कि मंजर भोपाली की शायरी साहित्य के क्षितिज तक पहुंचने जैसी है। उनकी यह यात्रा रेगिस्तान की खाक छानकर हासिल की गई सफलता कही जा सकती है। इस मौके पर पुस्तक का संकलन करने वाले डॉ महताब आलम ने कहा कि मंजर भोपाली के हिस्से जो शोहरत आई है, वह कम लोगों को ही मिलती है। उन्होंने कहा कि मंजर ने इकबाल से प्यार किया, मीर पर भरोसा किया, गालिब को अपनाया, मखदूम पर मुग्ध हुए, फैज पर मेहरबान हुए, जिसके बदले उनकी शायरी दुनियाभर में पहुंची है।
कुछ अलग है नया मंजर
उर्दू के अंतरराष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली के अब तक तेरह कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। साहित्यिक पत्रिका इंसानिया और अन्य पत्रिकाओं के माध्यम से मंजर भोपाली के विचार और कला पर विशेषांक भी प्रकाशित हो चुके हैं। लेकिन डॉ. महताब आलम द्वारा संकलित पुस्तक "इस्सब अल-अदब" इस मायने में महत्वपूर्ण है कि उनकी पुस्तक में प्रोफेसर जगन्नाथ आजाद, कैफ़ी आजमी, अली सरदार जाफरी, रईस अमरोहवी, जफर इकबाल, प्रोफेसर टिटुप चिश्ती, जॉन एलिया, अमजद इस्लाम, डॉ. बशीर बद्र, प्रो. सहर अंसारी, डॉ. तकी आबिदी, प्रो. सैयद फजल इमाम, प्रो. अख्तर अल वासा, गुलजार, मोहसिन भोपाली, रजा अली आबिदी, जफर सहबाई, आरिफ अजीज, इकबाल मसूद, डॉ. अंजुम बाराबंकवी, डॉ. सैयद फारूक, डॉ. अज़ीज़ुल्लाह शिरानी जैसे पचहत्तर से अधिक उर्दू लेखकों के लेख शामिल हैं। जिनकी रचनाओं का उर्दू साहित्य में सम्मान किया जाता है।
(भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट)