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MP News: कमलनाथ का  बड़ा हमला बोले-भाजपा ने 18 साल में आदिवासियों को देने के बजाए उल्टा छीना है

Mon, 18 Sep 2023 01:53 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

कमलनाथ बोले आज दु:ख की बात है कि आदिवासियों को अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है। आपने सबकुछ सीखा, लेकिन मुंह चलाना नहीं सीखा। यह आपकी बहुत बड़ी कमी रही। 
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पीसीसी चीफ कमलनाथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल हर वर्ग को साधने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में भोपाल के मानस भवन में मध्य प्रदेश आदिवासी कांग्रेस ने अमर शहीद आदिवासी जननायक राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें पीसीसी चीफ कमलनाथ ने बड़ा हमला करते हुए कहा कि भाजपा ने 18 साल की सरकार में आदिवासियों को देने के बजाए उनसे छीना है। 
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पीसीसी चीफ और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह एक जननायक थे। वह अंग्रेजों के खिलाफ लड़ें। उन्हें अंग्रेजों ने तोप से उड़ा दिया। कमलनाथ ने कहा कि आप सब अलग-अलग गांव और जिले से है, लेकिन एक बात समान है कि आपका डीएनए कांग्रेस का डीएनए है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश आदिवासी भाईयों का है। बाकी सब बाद में आए। आज दु:ख की बात है कि आदिवासियों को अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है। आपने सबकुछ सीखा, लेकिन मुंह चलाना नहीं सीखा। यह आपकी बहुत बड़ी कमी रही।  

उन्होंने कहा कि प्रदेश में आदिवासियों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हो रहे है। यह केंद्र सरकार की रिपोर्ट कह रही है।  मध्य प्रदेश आदिवासी अत्याचार में नंबर वन यह हमें शर्मिंदा करता है। कमलनाथ ने कहा कि भाजपा ने 18 साल में आदिवासियों को देने की जगह उल्टा छीना है। पैसा नियम को लेकर भर्ती में घोटाला किया। आदिवासी दिवस जो हमने शुरू किया, उसको बंद किया। अब नई शुरुआत करनी है। आप छाती ठोक कर डिमांड करिए। मुझे सबसे ज्यादा उम्मीद आदिवासियों से है। आप कांग्रेस और मेरा साथ नहीं सच्चाई का साथ दे। आदिवासियों ने ठान लिया तो कोई बदलाव से नहीं रोक सकता। आपने साथ दिया तो मध्य प्रदेश की विधानसभा में कांग्रेस का झंडा लहराएगा । 
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बता दें 2018 में आदिवासी समाज ने लंबे समय से सत्ता से बाहर कांग्रेस की सरकार बना दी थी। प्रदेश में 230 में से 47 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। इसमें 30 सीटें कांग्रेस ने जीती थी। यहीं वजह है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों का फोकस आदिवासी वोटरों पर ज्यादा है।  
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