मैनिट में आठवें साइंस फेस्टिवल का शुभारंभ
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विमान की कल्पना भारत में थी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में एक गौरवशाली, वैभवशाली, शक्तिशाली, समृद्ध और सशक्त भारत का निर्माण हो रहा है। उनकी सोच भी साइंटिफिक है। एक तरफ हमने योग, ध्यान, प्राणायाम और समाधि के जरिए ब्रह्मांड के सत्य को खोजने की कोशिश की। विमान की कल्पना हजारों साल पहले से ही भारत में थी। भारत के खगोल विज्ञानी भास्कराचार्य ने न्यूटन से सदियों पहले साबित किया था कि पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को एक विशेष शक्ति के साथ अपनी ओर आकर्षित करती है। अथर्ववेद में पहली बार लक्षणों के आधार पर ज्वर, खांसी, कुष्ठ जैसे रोगों की चिकित्सा का वर्णन है। ईसा से 600 साल पहले तक्षशिला और बनारस औषध विज्ञान के बड़े केंद्र बनकर उभरे थे।
हमने विज्ञान पश्चिम से नहीं लिया
शिवराज ने कहा कि चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में हर प्रकार की चिकित्सा का वर्णन है। ये हम नहीं कहते, जमाना कहता है। कोई ये न समझे कि हमने विज्ञान पश्चिम से लिया है। नवग्रह हमारे लिए कोई नए नहीं हैं। हमारे ऋषि इनके बारे में सालों पहले से जानते हैं। आज जिम्मेदारी के साथ यह कहता हूं कि धर्म और विज्ञान एक-दूसरे को काटते नहीं हैं, बल्कि समर्थन करते हैं। विज्ञान और आध्यात्म के इंटरकनेक्शन को हमने समझा है।
हमने नवाचार की नीति बनाई है
शिवराज ने कहा कि भारत ने दुनिया को शून्य दिया है। दशमलव की खोज भारत ने की। आज इस प्राचीन ज्ञान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा कि हम प्राचीन भारतीयों के बहुत एहसानमंद हैं जिन्होंने हमें गिनना सिखाया है। हमें अपने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। हमने अपनी विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की नीति बनाई है। गुड गवर्नेंस में हम तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग कर रहे हैं।
वेंचर कैपिटल फंड बनाएंगे
शिवराज ने कहा कि हमने नई स्टार्टअप नीति बनाई है। अगर आपके पास इनोवेटिव आइडिया है तो आपको निराश नहीं होने दूंगा। एक साल में मध्यप्रदेश में 2,600 स्टार्टअप बने हैं। छोटे कस्बों से भी प्रतिभाशाली बच्चे सामने आ रहे हैं। इस सोच और विचार को रुकने मत दो। इंदौर में हम स्टार्टअप पार्क बना रहे हैं। जरूरत पड़ी, तो भोपाल और ग्वालियर में भी बनाएंगे। हम वेंचर कैपिटल फंड बनाएंगे।
पीएम का धन्यवाद करता हूं
सीएम शिवराज ने कहा कि व्यक्ति जैसा सोचता और करता है, वैसा ही बन जाता है। अगर आप कुछ सोचोगे ही नहीं, तो मुंह पर बैठी मक्खी भी उड़ाने किसी और को आना पड़ेगा। इस उत्साह के साथ इस साइंस फेस्टिवल में आप लोग भाग लें।
देश मेंं प्रतिभा की कमी नहीं रही हैं
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि हमारे देश में प्रतिभा की कमी नहीं रही है। लोगों में क्षमता और जज्बा भी कम नहीं था। आंखों में सितारे भी कम नहीं थे, लेकिन शायद तब उस प्रकार अनुकूलता का वातावरण नहीं था। अब वातारण बदला है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार नित नए प्रयोगों को बढ़ावा दे रही है। मध्यप्रदेश के कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश में बांस बहुतायात में पाया जाता और वेस्ट-टू-वेल्थ सेक्टर में मध्यप्रदेश बहुत योगदान कर सकता है।
एमिटी भी कॉन्फ्रेंस में सहभागी
एमिटी यूनिवर्सिटी के शिक्षाविद भी साइंस फेस्टिवल में भाग ले रहे हैं। यूनिवर्सिटी की डॉ. तनु जिंदल, डॉ. रजनी सिंह, डॉ. नीरज शर्मा समेत प्रतिष्ठित एमिटी वैज्ञानिक इस दौरान विविध विषयों पर पैनल डिस्कशन में भाग लेंगे। फेस्टिवल में एमिटी वैज्ञानिक नए उत्पादों और तकनीक पर प्रकाश डालेंगे। डॉ. हर्षा खर्कवाल, डॉ. अमित खर्कवाल, प्रो. अमित वर्मा, डॉ. वीके जैन, डॉ. नूतन कौशिक और डॉ. सीमा गर्ग की रिसर्च भी इस दौरान पेश की जाएगी।